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सैनिक चंदू पर बोला पाक, अधिकारियों से तंग आकर इधर आया जवान

Sun, 22 Jan 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमृतसर
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Pakistan to release Indian soldier Chandu Babulal Chavan, who had inadvertently crossed LoC in 2016
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गलती से नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करने वाले सैनिक चंदू बाबूलाल चव्हाण (22) को पाकिस्तान ने शनिवार को रिहा कर दिया।  अटारी बार्डर के रास्ते वतन लौटे सैनिक चंदू को भारतीय समयानुसार करीब चार बजकर दस मिनट पर पाक रेंजरों ने भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया।
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खुफिया विभाग व सेना के वरीय अधिकारी रिसीव करने के बाद चंदू को खुफिया ठिकाने पर ले गए। अटारी बार्डर पर जैसे ही पाकिस्तानी रेंजर्स ने बीएसएफ को भारतीय सैनिक चंदू बाबू लाल चव्हाण को सौंपा। 

दस्तावेज पूरे करने के बाद चंदू बाबू को लेकर बीएसएफ मुख्यालय (अटारी बार्डर स्थित) में ले जाया गया। चंदू को किसी से भी बात नही करने दी गई। हालांकि चंदू बाबू लाल चव्हाण की आंखों में पाकिस्तानी हुकूमत का दर्द दिख रहा था।
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गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में भारतीय सेना ने जिस दिन पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था, उसके कुछ घंटे बाद ही 37 राष्ट्रीय राइफल्स में तैनात चंदू कश्मीर की एलओसी पार कर पाकिस्तान चले गए थे। उन्हें अटारी-वाघा सीमा से वापस किया गया। 

पाकिस्तान से रिहा होने के बाद सीमा सुरक्षा बल ने पहले उन्हें सेना को सौंपा और फिर सेना उन्हें अज्ञात स्थान पर ले गई। चव्हाण के भाई भूषण चव्हाण भी सैनिक हैं और उन्होंने सेना के इन प्रयासों का शुक्रिया अदा किया।

सर्जिकल स्ट्राइक के दिन गलती से पाक पहुंचा था सैनिक

सीमा पर गश्त करते सेना के जवान - फोटो : File Photo
उन्होंने कहा, ‘चंदू की रिहाई के लिए मैं डीजीएमओ और सेना के प्रयासों का आभारी हूं, इसे कभी भूल नहीं सकता। मैं भी एक सैनिक हूं और अंतिम सांस तक पूरी ईमानदारी के साथ अपना कर्त्तव्य निभाता रहूंगा। मैं ग्रामीणों और हर किसी का आभारी हूं जिन्होंने न सिर्फ मेरे भाई के लिए बल्कि इस देश के एक जवान के लिए भी दुआ की।’ 

चव्हाण महाराष्ट्र के धुले जिले में बोरविहिर गांव के रहने वाले हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा उन्हें पकड़ लिए जाने की खबर सुनकर ही उनकी दादी का निधन हो गया था। अटारी में तैनात एक अधिकारी ने बताया कि सेना के डॉक्टरों की टीम पहले चव्हाण की मेडिकल जांच करेगी। 

रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे और उनका मंत्रालय तथा डीजीएमओ चंदू चव्हाण की रिहाई के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर लेने के बाद वह अपने घर जा सकते हैं। 

भामरे ने कहा, ‘पाकिस्तान के कब्जे से सैनिक को छुड़ाने के लिए विदेश मंत्रालय भी प्रयासरत था। आखिरकार सभी विभागों की कोशिश और लोगों की दुआएं शनिवार को सफल हो गईं। हमारे डीजीएमओ भी पाकिस्तानी डीजीएमओ के संपर्क में थे। पिछले हफ्ते हमें बताया गया कि चंदू चव्हाण को जल्द रिहा कर दिया जाएगा।’

भारतीय जवान की रिहाई का एलान पाकिस्तान सेना ने शनिवार को ही बयान जारी कर किया था। इसके बयान के मुताबिक, यह जवान अपने अधिकारियों से तंग आकर यह सोचते हुए गलती से एलओसी पार कर गया था वह घर लौट जाएगा। पाकिस्तान के मेजर जनरल आसिफ गफूर ने ट्वीट कर कहा, ‘पाकिस्तान सेना गुडविल के तहत भारतीय जवान को रिहा कर रही है।’ 
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अब दादी की अस्थियां भी प्रवाहित हो पाएंगी 

Pakistan to release Indian soldier Chandu Babulal Chavan, who had inadvertently crossed LoC in 2016
वहीं पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘भारतीय जवान को रिहा करने का पाकिस्तान सरकार का फैसला मानवीय आधार पर किया गया है और इस प्रतिबद्धता से एलओसी तथा सभी सीमाओं पर शांति एवं सौहार्द का माहौल सुनिश्चित होगा। पाकिस्तान शांतिप्रिय पड़ोसी बन रहने में यकीन करता है और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा को चोट पहुंचाने वाली सभी गतिविधियों को खारिज करता है।’

अब दादी की अस्थियां भी प्रवाहित हो पाएंगी 
भारतीय सैनिक चंदू चव्हाण के परिजनों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब चंदू की दादी की अस्थियां भी नदी में प्रवाहित की जा सकेंगी। अपने पोते को पाकिस्तानी सेना द्वारा गिरफ्तार कर लेने की खबर सुनकर ही उनकी दादी सदमे में आ गई थी और दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था। 
चंदू के भाई भूषण चव्हाण ने बताया, ‘इसी वजह से हमने तय किया था कि जब तक चंदू वापस नहीं आ जाता, दादी की अस्थियां नदी में प्रवाहित नहीं की जाएंगी। अब वह दिन भी आ गया है।’

पहले रिहा होकर लौटे भारतीय
अगस्त, 2014: पाकिस्तान ने सीमा सुरक्षा बल के जवान सत्यशील यादव को भारत को सौंपा था। सत्यशील जम्मू से 35 किलोमीटर दूर चेनाब नदी में एक किश्ती में रूटीन गश्त के दौरान किश्ती में खराबी के कारण पाकिस्तान की तरफ बह गए थे।
- अप्रैल, 2011: 27 साल से पाक जेल में कैद गुरदासपुर के गोपाल दास को पाक ने रिहा कर दिया। 1984 में वह सीमा पार कर गलती से उस ओर चले गए थे जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। जासूसी के आरोप में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
- 4 मार्च, 2008 : 35 वर्षों के बाद कश्मीर सिंह की रिहाई हुई। उन्हें जासूसी करने के आरोप में 1973 में गिरफ्तार किया गया था।
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