पाकिस्तान को लेकर चौंकाने वाला खुलासा। दरअसल, पाकिस्तान अब सेना के जरिए भारत की जासूसी करने के लिए नए तरीके तलाश रहा है। इसके चलते सेना को अलर्ट रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। अंबाला में उतर भारत के सबसे बड़े आर्मी बेस कैंप में अफसरों और जवानों को अलर्ट दिया गया है।
पहले पाक खुफिया एजेंसियां जवानों और सैन्य अफसरों को सीधे पाक से ही फोन करके उन्हें अपने झांसे में लेने का प्रयास किया जाता रहा है। लेकिन अब पाक खुफिया एजेंसियों के विशेषज्ञों ने खास तकनीक के जरिए पाकिस्तान से आने वाले कॉल्स को भारतीय नेटवर्क में डायवर्ट कर उनसे भारतीय सेना के जवानों और अफसरों को फोन करना शुरू कर दिया है।
लेकिन भारतीय सेना की एजेंसियों ने अब पाक खुफिया एजेंसियों की इस हरकत को भी भांप लिया है। जिसके चलते भारतीय सेना ने सभी छावनियों के सैन्य अफसरों और जवानों को अलर्ट भी किया है। अंबाला की लोकल मिलट्री अथारिटी भी इस बात को लेकर पूरी तरह से गंभीर हो गई है और अथारिटी ने अपने अधीनस्थ सभी यूनिटों के जवानों और अफसरों को इस बाबत अलर्ट रहने को भी कहा है।
इस तरह करते हैं जासूसी
अमृतसर में वाघा बॉर्डर
एक सैन्य अफसर ने बताया कि पाकिस्तान के इस हरकत को लेकर सैन्य अफसर पूरी तरह से अलर्ट और चौकस है। उन्होंने बताया कि पहले 92 नंबर से फोन आते थे, तो मालूम चल जाता था, लेकिन अब पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां अपनी काल्स को स्पेशल तकनीक के जरिए इंडियन नेटवर्क से डॉयवर्ट कर सेना के अफसरों और जवानों को फोन कर उन्हें खंगालने के प्रयास में लगी है।
खुफिया एजेंसियां सैन्य अफसरों और जवानों को फोन इंश्योरेंस, बैंक अफसर और अन्य कर्मचारी बनकर उनकी डिटेल पूछते हैं, उनका पता पूछते हैं, कहां तैनात है, उस शहर का नाम पूछते हैं, उनकी यूनिट का नाम व नंबर पूछते हैं इत्यादि। इससे पाक खुफिया एजेंसियों को ये मालूम चल जाता है कि कौन सी सैन्य यूनिट इस वक्त किस जिले में तैनात है?
सैन्य अफसर ने बताया कि इसी के चलते भारतीय सेना भी अब इस तरह के फोन काल्स का नेटवर्क खंगालने में जुटी है। सैन्य अफसरों व जवानों को निर्देश दिए हैं कि इस तरह की संदिग्ध कॉल्स का नेटवर्क कंफर्म होने के बाद वे उस सिमकार्ड को नष्ट कर नंबर बदल दें, जिस पर पाक नेटर्वक से फोन आया है।
रेलवे अफसर भी रहते हैं निशाने पर
वाघा बॉर्डर पर भारत और पाकिस्तान में बंटी मिठाई
- फोटो : अमर उजाला
पाक खुफिया एजेंसियों के निशाने पर केवल सैन्य ही नहीं, बल्कि रेलवे अफसर भी रहते हैं। इसी को लेकर मिनस्ट्री ऑफ रेलवे ने कुछ समय पहले सभी रेल मंडलों को इस बाबत सर्कुलर जारी कर अर्लट भी किया था। पाक खुफिया एजेंसियां जानती है सेना की यूनिट का सबसे बड़ा मूवमेंट रेलवे के जरिए ही होता है।
सभी गाडिय़ां, टैंक व अन्य सामग्री को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए रेलवे ही सेना को स्पेशल ट्रेन उपलब्ध करवाता है। इसलिए पाक खुफिया एजेंसियां इंडियन नेटवर्क का इस्तेमाल कर रेलवे अफसरों को फोन करके खुद को भारतीय सेना के अफसर बताते हैं और फिर उनसे सूना मूवमेंट की जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं।
लेकिन सेना की खुफिया एजेंसियों के अलर्ट के बाद कुछ समय पहले रेलवे ने भी सभी मंडलों के डीआरएम को निर्देश दिए थे कि वे अपने अधीनस्थ अफसरों को निर्देश दे कि किसी भी व्यक्ति को चाहे वे कोई भी हो, फोन पर सेना मूवमेंट के लिए बुक की गई ट्रेन की जानकारी न दें।