पाकिस्तान ने अपने ही 30 लोगों को पहचानने से इंकार कर दिया है। मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट दखल दे रही है, ताकि उनकी वतन वापसी हो सके।
सजा पूरी करने के बाद भी 30 पाकिस्तानी कैदी वतन वापसी के इंतजार में अब अमृतसर जेल के ट्रांजिट कैंप में दिन गुजार रहे हैं। केंद्र सरकार ने बताया कि अमृतसर सेंट्रल जेल के ट्रांजिट कैंप में ऐसे 38 पाकिस्तानी कैदी थे, जो सजा माफ़ी के हकदार थे। उनमें से 6 कैदियों को वापस पाकिस्तान भेजा जा चुका है, 2 की मौत हो चुकी है।
30 पाकिस्तानी कैदियों के मामले में पाकिस्तान ने इन्हें पहचानने से मनाकर दिया है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को यह जानकारी स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई केदौरान केंद्र सरकार ने दी है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया सत्य पाल जैन की ओर से दी गई जानकारी पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह हलफनामा अक्तूबर तक की स्थिति दर्शाता है।
ऐसे में केंद्र बताए कि वर्तमान में इन पाकिस्तानी कैदियों की क्या स्थिति है। हाईकोर्ट ने पाकिस्तानी कैदियों का ब्यौरा भी तलब किया है। पूछा है कि इनको किस अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया था और कितनी सजा सुनाई गई थी।
पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को नोटिस जारी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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इसकी जानकारी पंजाब सरकार को मामले की अगली सुनवाई पर हाईकोर्ट को देनी होगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे उन कैदियों के मामले की सुनवाई के दौरान दी है, जो अब सजा माफी के हकदार हैं।
गत वर्ष पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट को बताया गया था कि पंजाब की जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 284 ऐसे कैदी हैं, जो अब सजा माफी के हकदार हैं। इनमें से 38 कैदी पाकिस्तानी हैं, जो अमृतसर की सेंट्रल जेल में हैं। इन 38 पाकिस्तानी कैदियों की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन वे अभी भी जेल में हैं। सजा पूरी हो जाने के कारण इन्हें अलग से ट्रांजिट कैंप में रखा हुआ है।
इनकी रिहाई के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा जा चुका है। जैसे ही केंद्र सरकार इन कैदियों के मामले में कोई आदेश देती है तो इन्हें रिहा कर दिया जायेगा। गौरतलब है की हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर ही ऐसे कैदियों के मामले में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।