नारको टेररिज्म की तरह देखा जाए इस केस को
अदालत में एजेंसी ने कहा कि नशा तस्करी के इस केस को नारको टेररिज्म (नशे का आतंक) केस समझा जाए। क्योंकि नशे से होने वाली कमाई को आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है। जिस तरीके से वहां नमक और अन्य चीजों में नशा आ रहा है। वह इस बात की तरफ साफ संकेत दे रहा है। एजेंसी ने पाकिस्तान के एक बड़े नमक व्यापारी नूर मोहम्मद का नाम भी अदालत बताया है। उसकी भूमिका भी जांच में सामने आ रही है।
ऐसे खुली थी ड्रग तस्करी की पोल
मामला 26 जून का है । पाक एक्सपोर्टर ने रॉक साल्ट (नमक) का एक ट्रक भेजा था। इस ट्रक में 600 बोरियां थीं। पाक का ड्राइवर ट्रक अनलोड करवाकर वापस लौट गया। यह खेप अमृतसर के इंपोर्टर गुरपिंदर सिंह ने मंगवाई थी। शनिवार को गुरपिंदर का कस्टम हाउस एजेंट खेप रिलीज करवाने आया था। जांच के दौरान इसमें सफेद पैकेट होने की बात सामने आई। चेकिंग के दौरान इसमें 532 किलो ड्रग्स बरामद हुई।
अमृतसर जिले को सबसे ज्यादा नुकसान
एजेंसी ने अदालत में बताया कि नशा तस्करी से सबसे प्रभावित एरिया अमृतसर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सीमा के बिल्कुल करीब है। वहीं, अदालत में एनआईए ने जवाब में कहा है कि अमृतसर के गांव मकबूलापुरा को विधवाओं के गांव से जाना जाता है। क्योंकि गांव के अधिकतर पुरुषों की नशे की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। यह गांव अंतरराष्ट्रीय सीमा से बिलकुल सटा हुआ है।
संदीप कौर की जान को खतरा
एनआईए ने अदालत में कहा कि आरोपी संदीप कौर यदि जेल से बाहर आती है तो उसकी जान को खतरा है। क्योंकि यह कारोबार काफी राज्यों में फैला हुआ है। इसके अलावा कई बड़े लोग इससे जुड़े हैं, जो उसकी जान को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जबकि इसी मामले से जुड़े मुख्य आरोपी गुरपिंदर सिंह की अमृतसर जेल में संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी।
तीन आरोपियों के प्रोडक्शन वारंट की तैयारी
दूसरी तरफ राष्ट्रीय एजेंसी ने जिला अदालत में नशा तस्करी के आरोपी निर्भल सिंह, जसबीर सिंह और आलोक गुप्ता को प्रोडक्शन वारंट पर लेने की तैयारी की है। सभी आरोपी अभी जेल में हैं।