सीमांत गांव के निवासी तारा सिंह ने बताया कि मंगलवार को रात पौने 10 बजे उन्हें पाकिस्तानी गांव रजीवाला, महालम व हाकू वाड़ा की तरफ ढोल नगाड़ों की आवाज सुनाई दी। उन्होंने सोचा कि कुछ दिनों से इन गांवों में सन्नाटा था और लोगों को यहां से हटा दिया था तो अचानक ढोल नगाड़े रात के समय क्यों बजने लगे।
तारा सिंह ने बताया कि ध्यान से सुनने पर उन्हें ढोल नगाड़े की आवाज के बीच टैंकों की आवाज सुनाई पड़ी। इस दौरान बाहर आए तो बॉर्डर पर पाक सेना के वाहनों के दौड़ने की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। बलविंदर सिंह ने बताया कि उन्हें पाक पर कोई भरोसा नहीं है। 1965 और 1971 में भी धोखे से पाकिस्तान ने भारत पर हमला किया था। 1971 में भारत की तरफ सेना के जवान पार्टी कर रहे थे तो पाक ने जंग छेड़ दी थी।
प्रशासन ने स्थापित किए आठ रिलीफ कैंप
प्रशासन ने पूरे जिले में आठ रिलीफ कैंप स्थापित किए हैं। यहां ब्लाक विकास पंचायत अधिकारी सर्बजीत सिंह बराड़ और जिला परिषद् के सचिव गुरमीत सिंह ढिल्लों की ड्यूटी लगाई है।