रमजान के पवित्र माह में शुक्रवार देर शाम पाकिस्तान ने 113 भारतीय मछुआरों को रिहा कर दिया है। सभी कैदी भारत पहुंच गए हैं। तहसीलदार पीएस गोराया ने प्रशासन की ओर से इनको रिसीव किया। भारत ने भी इस अवसर पर 80 पाकिस्तानी कैदी मछुआरों को रिहा किया है।
रिहा कैदियों को पाकिस्तान रेंजर्स के उच्चाधिकारी मोहम्मद रशीद ने बीएसएफ के कमांडेंट रण सिंह के हवाले किया। पाकिस्तान से रिहा होकर आए मछुआरों ने बताया कि समुद्र में तूफान आने के कारण उनकी किश्तियां पाकिस्तान की सीमा तक पहुंच गई थी। पाकिस्तान समुद्र तट पर पाकिस्तानी सेना ने उन्हें पकड़ लिया और अदालत में पेश किया।
कई मछुआरों को आठ और कइयों को एक साल की सजा हुई। मछुआरे वीरू और फूला ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास से ही उन्हें मुक्ति मिली है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की कराची में बनी जेल लांडी और मलीर में कैदियों के लिए पर्याप्त प्रबंध नहीं है। जेल में गंदगी है और मच्छरों की भरमार से कैदी बीमार हो जाते हैं।
डॉक्टर भी कैदी को बिना जांचे ही दवाई दे देते हैं। लांडी जेल में कई कैदी बीमार हैं और उनका सही तरीके से इलाज नहीं हो पा रहा। बाई, दइया और गुलाब हुसैन ने बताया कि दोनों देशों की सरकारों को फैसला लेना चाहिए कि यदि कोई मछुआरा गलती से उस पार पहुंच जाए तो उसे तुरंत रिहा कर दिया जाए। पाकिस्तान सरकार की ओर से उनकी नावों को भी कब्जे में ले लिया जाता है, लेकिन मछुआरों की रिहाई के दौरान नावों को वापस नहीं दिया जाता।