काबिले जिक्र है कि मंगलवार सुबह सलेमटाबरी के पास लगी राजीव गांधी की प्रतिमा पर शिअद यूथ नेता गुरदीप गोशा और मीतपाल सिंह दुगरी ने कालिख पोत दी थी। इसके बाद पंजाब की सियासत का पारा चढ़ गया। खुद मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस मुद्दे पर ट्वीट कर अधिकारियों को कार्रवाई करने के आदेश जारी किए। देर शाम पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ नगर निगम में तैनात जेई की शिकायत पर मामला दर्ज करते गुरदीप गोशा को गिरफ्तार कर लिया।
बुधवार सुबह निगम बिल्डिंग ब्रांच मुलाजिमों ने भदौड़ हाउस के पास बनी बिल्डिंग को तोड़ दिया। यह बिल्डिंग गुरदीप गोशा के रिश्तेदार की है। निगम अधिकारी खुद मान रहे हैं कि इस बिल्डिंग का नक्शा पास हो चुका है लेकिन बिल्डिंग का निर्माण नियमों के अनुसार नहीं हुआ था, इसलिए कार्रवाई की गई। शहर में अन्य अवैध इमारतों पर कार्रवाई करने के जगह सिर्फ एक बिल्डिंग को टारगेट करने से साफ है कि राजनीतिक रंजिश निकालने के लिए सत्ताधारी अब निगम अफसरों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस ने गोशा और मीतपाल के खिलाफ धारा 153ए लगाई है, जो कायदे से लगती नहीं है। राजीव गांधी की प्रतिमा न तो नगर निगम ने लगाई और न किसी अन्य सरकारी विभाग ने। यह धारा तो अपनी पगड़ी से मूर्ति को साफ करने वाले गुरसिमरन मंड के खिलाफ लगनी चाहिए। जिसने दशम गुरु द्वारा दी गई दस्तार की बेअदबी की है। निगम अफसरों को सिर्फ गोशा के रिश्तेदार की अवैध बिल्डिंग दिखी। इन दोनों मामलों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। - बिक्रम मजीठिया, पूर्व मंत्री