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Chandigarh News: पद्म अवॉर्ड... समाज सुधारक और सेवा के प्रतीक है संत निरंजन दास

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-शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में किए महत्वपूर्ण काम
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जालंधर। डेरा सचखंड बल्लां के गद्दीनशीन संत निरंजन दास जी समाज सुधारक, आध्यात्मिक गुरु और मानव सेवा के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन सेवा, समानता और आध्यात्मिक चेतना के आदर्शों से ओतप्रोत रहा है। उन्होंने गुरु रविदास जी की शिक्षाओं को जीवन का मार्गदर्शक बनाया और संतमत की परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
साधारण परिवार में जन्मे संत निरंजन दास जी बचपन से ही आध्यात्मिक प्रवृत्ति और सेवा भाव के लिए जाने जाते थे। अपने गुरु संत सरवन दास जी के सान्निध्य में उन्होंने साधना और समाज सेवा का मार्ग अपनाया। आगे चलकर उन्होंने डेरा बल्लां की जिम्मेदारी संभाली और इसे केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि शिक्षा, समाज सेवा और जनकल्याण का सशक्त केंद्र बना दिया।
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संत निरंजन दास जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे प्रभावशाली माध्यम माना। उन्होंने गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए स्कूल, छात्रवृत्तियाँ और शिक्षा सहायता योजनाएँ शुरू कीं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। मुफ्त मेडिकल कैंप, रक्तदान शिविर और जरूरतमंदों के इलाज में सहयोग उनके कार्यों की प्रमुख पहचान हैं। आज भी डेरा बल्लां द्वारा अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
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देश-विदेश में संदेश का प्रचार
उनके नेतृत्व में बनारस (वाराणसी) स्थित डेरा भी आध्यात्मिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बन गया। वहां सत्संग, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामाजिक जागरूकता अभियानों के जरिए गुरु रविदास जी के समानता, प्रेम और भाईचारे के संदेश को देश-विदेश तक पहुंचाया गया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेरा बल्लां का दौरा किया और संत निरंजन दास जी से मुलाकात की, उनके सेवा और सामाजिक योगदान की सराहना की। संत निरंजन दास जी केवल एक आध्यात्मिक गुरु नहीं, बल्कि लाखों अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और सामाजिक चेतना के प्रतीक बने हैं। उनका जीवन करुणा, सेवा और मानवता का जीवंत उदाहरण है।
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