दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में जहरीली धुंध छाने का कारण हरियाणा में पराली जलाना माना जाता है। इससे निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) के बगैर धान की कटाई को अवैध घोषित कर दिया है। इस संबंध में सभी जिलों को निर्देश जारी कर एसएमएस को अनिवार्य रूप से लागू कराने के निर्देश दिए गए हैं। इस सिस्टम के अनुसार धान की फसल के अवशेषों के महीन टुकड़े कर खेत में मिलाकर खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे पराली नहीं जलानी पड़ेगी और दिल्ली-एनसीआर में छाने वाली जहरीली धुंध से भी निजात मिलेगी। कृषि विभाग रोहतक के सहायक कृषि अभियंता गोपीराम सांगवान ने बताया कि कंबाइन से कटाई में फसल के अवशेष के टुकड़े बड़े होते हैं, जिन्हें किसान जला देते हैं और प्रदूषण होता है। ऐसे में आगामी धान की फसल की कटाई के साथ एसएमएस को अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके बगैर कटाई अवैध होगी और किसान पर कार्रवाई की जा सकती है। उपायुक्त रोहतक डॉ. यश गर्ग ने कहा कि फसलों के अवशेष जलाएं जाने से पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। किसानों को इसकी जानकारी देने के लिए पंचायत विभाग, राजस्व विभाग, कृषि विभाग और पशुपालन विभाग सहयोग करेगा। खंड और उपमंडल स्तर पर कमेटी बनाकर एसडीएम को नोडल अधिकारी बनाया है, जिससे पराली नहीं जलाई जा सके।
मिट्टी में मिलाए जाने के 40 दिन में अवशेष बन जाएंगे खाद
स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम से अवशेषों के महीन टुकड़े करके खेत की मिट्टी में मिलाया जाएगा। महज 40 दिन में यह महीन टुकड़े खाद में तब्दील हो जाएंगे और हैप्पी सीडर से आसानी से गेहूं की बिजाई हो सकेगी।
हर गांव में लगेगा डेमो प्लांट, अवशेषों को मिट्टी में मिलाना सिखाएंगे
हर गांव की पांच एकड़ जमीन पर डेमो प्लांट बनाए जाएंगे, जहां किसानों को फसल अवशेष के महीन टुकड़े करके खेत की मिट्टी में पराली जलाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।