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बुजुर्ग ने सुनाई पुलिस के जुल्मों की कहानी, बॉक्सर बेटे की डेड बॉडी मिली थी

Fri, 16 Dec 2016 12:48 PM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
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पंचकूला पुलिस कर रही बुजुर्ग दंपति को परेशान
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बूढ़ी हो चुकी पत्नी बिलख-बिलख कर रोती है। मेरी आंखें पथरा गईं हैं, इंसाफ की राह देखते-देखते और पुलिस है कि चैन की सांस नहीं लेने देती। थाने के चक्कर काटकर थक गया हूं, लेकिन बेटे के हत्यारों का पता लगाने के बजाय पुलिस उल्टा अदालत में केस रद्द कराने पहुंच गई। यह आरोप मृतक योगेश के पिता ने जीआरपी पर लगाया है। लेकिन जब अदालत में जज ने पीड़ित से पूछा कि क्या पुलिस की कार्रवाई से आप संतुष्ट हैं तो पीड़ित ने कहा बिल्कुल नहीं।
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पुलिस उन्हें अंधेरे में रखकर मामले की जांच कर रही है। किसलिए उन्हें अदालत बुलाया गया है, उनको ये भी नहीं पता। मृतक योगेश के पिता नरेश ने अदालत को बताया कि सुनवाई जब कहीं नहीं हुई तो अब वह इस मामले को अदालत में लाए हैं। अदालत से ही उन्हें न्याय की उम्मीद है। क्योंकि इतनी जगह शिकायतों के बाद कार्रवाई नहीं हुई।   

जीआरपी एसएचओ ने बिना कारण बताए बुलाया कोर्ट
नरेश कुमार ने बताया कि जीआरपी एसएचओ ने उन्हें 6 दिसंबर को पत्र लिखा था कि 7 दिसंबर को आपको कोर्ट में पेश होना है। जब सात दिसंबर की सुबह वह अदालत पहुंचे तो वहां नोटिस बोर्ड पर उनका नाम तक नहीं था। सरकारी वकील के पास गए तो जीआरपी एसएचओ का हवाला देकर उन्हें पूरी बात बताई।
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वकील ने तुरंत एसएचओ को फोन किया तो आधे घंटे बाद एसएचओ बलकार सिंह अदालत पहुंचे और फाइल वकील के टेबल पर रख दी। लेकिन नरेश को उस समय तक पता नहीं लगा कि उन्हें अदालत में बेटे की हत्या के इतने माह बाद बुलाया क्यों गया है। जब वकील ने फाइल को पढ़ाकर नरेश को बताया तब पता चला कि केस रद्द कराने के लिए जीआरपी एसएचओ ने उन्हें अदालत बुलाया है।     
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हत्या के तेरह माह बाद भी नहीं मिला इंसाफ

dead body - फोटो : demo pic
बेटे के हत्या के 13 माह बाद भी बुजुर्ग दंपति को इंसाफ नहीं मिला। नरेश कुमार ने योगेश की हत्या के मामले की जांच सही नहीं होने पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, रेलमंत्री, राज्यपाल, हरियाणा के मुख्यमंत्री सहित पुलिस के आला अधिकारियों को भी पत्र लिखा। लेकिन अभी उनके पास से उन्हें कार्रवाई का इंतजार है।

संदिग्ध हालत में मिला था योगेश का शव
हरमिलाप नगर और इंडस्ट्रियल एरिया के बीच रेलवे ट्रैक पर 19 सितंबर 2015 को 31 वर्षीय योगेश कुमार का शव संदिग्ध हालत में मिला था। योगेश के शरीर की कई हड्डियां टूटी हुईं थी। एक पैर पर गंभीर चोट के निशान थे। योगेश पेशे से इंजीनियर होने के साथ बॉक्सर भी था।

हत्या के सात माह बाद दर्ज हुआ मामला
बलटाना निवासी नरेश कुमार ने बताया कि जीआरपी के आला अधिकारियों को 20 जून 2015, 22 अक्तूबर 2015, 2 नवंबर 2015, 27 नवंबर 2015, 14 अप्रैल 2016, 30- अप्रैल 2016 को उन्होंने शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने 28 अप्रैल 2016 को एफआईआर दर्ज की। उन्होंने बताया कि इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई नहीं की।
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