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चंडीगढ़ में संकट: अब दवा की दुकानों से ऑक्सीमीटर गायब, रेमडेसिविर और टोसिलिजुमैब की पहले से है कमी 

Mon, 26 Apr 2021 02:37 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जब से मरीजों में आक्सीजन स्तर के कम होने की खबरें फैलना शुरू हुई हैं, तब से लोगों ने ऑक्सीमीटर व जरूरी दवाओं को खरीदकर घर पर रखना शुरू कर दिया है। 
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चंडीगढ़ में ऑक्सीमीटर की कमी। - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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चंडीगढ़ में दवाओं का संकट गहरा गया है। कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं इटोलीजुमैब, रेमडेसिविर व टोसिलिजुमैब की पहले से कमी थी। अब शहर से ऑक्सीमीटर गायब हो चुका है। शहर की कई केमिस्ट शॉप के पास ऑक्सीमीटर नहीं है।

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बताया जा रहा है कि जब से मरीजों में आक्सीजन स्तर के कम होने की खबरें फैलना शुरू हुई हैं, तब से लोगों ने ऑक्सीमीटर व जरूरी दवाओं को खरीदकर घर पर रखना शुरू कर दिया है। ऑक्सीमीटर के साथ विटामिन सी, जिंक, विटामिन डी की दवाओं की भी काफी मांग है, लेकिन ये दवाइयां फिलहाल बाजार में उपलब्ध हैं।


शहर में सबसे ज्यादा किल्लत रेमडेसिविर व टोसिलिजुमैब की है। चिकित्सक इन दवाओं का इस्तेमाल कोरोना संक्रमितों के इलाज में कर रहे हैं। रेमडेसिविर की तो थोड़ी बहुत सप्लाई हो रही है, लेकिन टोसिलिजुमैब नहीं मिल रहा। इस इंजेक्शन का निर्माण स्विट्जरलैंड की रॉश कंपनी करती है। भारत में सिप्ला कंपनी इसकी वितरक है। आठ दिन से ज्यादा संक्रमित रहने वाले मरीजों के लिए डॉक्टर यही इंजेक्शन लिख रहे हैं। मरीज के परिजन इस दवाओं को खरीदने के लिए मुंह मांगी राशि देने को तैयार हैं। 
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सिप्ला कंपनी से जुड़े लोगों का कहना है कि उन्हें सूचना मिली है कि 28 अप्रैल तक टोसिलिजुमैब का स्टॉक शहर में आ सकता है। पुख्ता जानकारी सोमवार को मिलेगी। भाजपा मेडिकल सेल के प्रिंस भंढुला ने बताया कि शहर में ऑक्सीमीटर नहीं होने की सूचना मिली है। इस बारे में डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क कर शहर में जल्द से जल्द इसकी सप्लाई करवाई जाएगी।

पांच हजार रेमडेसिविर का ऑर्डर, मिल रही 100 तो कभी 70

स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. अमनदीप कंग ने बताया कि रेमडेसिविर के पांच हजार इंजेक्शन का आवंटन किया गया है, लेकिन कंपनी की ओर से स्टॉक बहुत कम आ रहा है। कभी 100 इंजेक्शन मिलते हैं तो कभी 70। एक हफ्ते से रेमेडेसिविर की सप्लाई शुरू हुई है, जो भी इंजेक्शन आते हैं पहले उन्हें सरकारी अस्पतालों में दाखिल मरीजों को दिया जाता है। इसके बाद पीजीआई व मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस बात की भी निगरानी रखी जा रही है कि इन दवाओं की कोई कालाबाजारी न हो।

दवा कितनी कारगर पता नहीं, लेकिन मरीज को दी जा रही
पीजीआई के डीन प्रो. जीडी पुरी ने बताया कि रेमडेसिविर व टोसिलिजुमैब कोरोना मरीजों में कितनी कारगर है, अभी ऐसा कोई अध्ययन सामने नहीं आया है। इसके बावजूद गंभीर मरीजों को ये दवाएं दी जा रही हैं। नाम न छापने की शर्त पर कुछ चिकित्सकों ने बताया कि कुछ गंभीर मरीजों को इन दवाओं का फायदा हुआ तो कुछ में नहीं। कोविड की फिलहाल कोई दवा है नहीं। जब डॉक्टर के पास कोई विकल्प नहीं बचता है तो इन दवाओं का ही सहारा लेना पड़ता है।

सोशल मीडिया पर डाला मैसेज, इंजेक्शन नहीं मिलने पर गई जान
चंडीगढ़ के वंश खंडूजा ने सोशल मीडिया पर एक मैसेज डाला है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि कोरोना संक्रमित आशा खंडूजा पंचकूला के एक हॉस्पिटल में दाखिल थीं, जो अब नहीं रहीं। टोसिलिजुमैब नहीं मिलने से उनकी जान चली गई है। डॉक्टर से कई बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी ओर से इस इंजेक्शन का कोई विकल्प नहीं बताया गया। इस दवा की कमी से हमने अपने परिवार के दूसरे सदस्य को खोया है।
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रोज 100 लोग रेमडेसिविर लेने आते हैं, लेकिन मदद नहीं कर पा रहे

रोजाना 100 से ज्यादा लोग रेमडेसिविर लेने आते हैं, लेकिन मजबूर होकर उनकी मदद नहीं कर पा रहे हैं। लोग दुकान में आकर गुहार लगाते हैं। कई लोग तो रोने लगते हैं। रेमडेसिविर की काफी कमी है। ऑक्सीमीटर अब नहीं मिल रहा। - कमल ललित, दुर्गा मेडिकोज, सेक्टर-11 चंडीगढ़

पिछले चार दिन से नहीं है ऑक्सीमीटर 
पिछले चार दिन से ऑक्सीमीटर नहीं है। कंपनी की ओर से सप्लाई ठप पड़ी है। कोरोना की दूसरी दवाओं का भी संकट बना हुआ है। स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखकर कुछ और दुकानों में भी रेमडेसिविर बेचने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक मिली नहीं है। -रमेश सिंगला, सिंगला मेडिकोज, सेक्टर-16 चंडीगढ़

टोसिलिजुमैब के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है कि कब तक मार्केट में आएगी? सूचना थी कि 28 के अप्रैल के आसपास स्टॉक पहुंच सकता है। -अमित दुग्गल, ड्रग कंट्रोलर चंडीगढ़

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