संसद में पेश हुए आम बजट 2016-17 के प्रस्तावों में हरियाणा को प्रत्यक्ष तौर पर कुछ भी हाथ नहीं लगा है। पिछले वर्ष प्रदेश को एक बागवानी विश्वविद्यालय और महिला प्रशिक्षण केंद्र मिले थे, लेकिन इस बार हैपनिंग हरियाणा के साथ प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने की जी-तोड़ कोशिश में लगी प्रदेश सरकार की मेहनत को केंद्र सरकार ने अनदेखा कर दिया है।
नए बजट में न तो कोई नया प्रोजेक्ट हरियाणा को दिया गया है और न ही प्रदेश की किसी जनकल्याण योजना में केंद्र ने भागीदारी का प्रोत्साहन दिखाया है।
वहीं, पड़ोसी राज्य पंजाब को एम्स, अमृतसर व जलियांवाला बाग की ऐतिहासिक धरोहरों को पुनरोत्थान की योजनाओं के साथ-साथ श्री गुरु गोबिंद सिंह के 350वें जन्मदिवस के लिए 100 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रावधान इस बजट में किया गया है।
हालांकि, हरियाणा की भाजपा सरकार और उसके मंत्री इस बजट को गरीब हितैषी, किसान हितैषी और सभी वर्गों के हित में बताते हुए इसकी जोरदार वकालत कर रहे हैं, लेकिन इस बजट ने प्रदेश सरकार को झटका ही दिया है। सबसे पहला झटका हैपनिंग हरियाणा अभियान को लगा है, जिसके आयोजन की तिथि 7 व 8 मार्च इसलिए निर्धारित की गई थी ताकि केंद्रीय बजट में प्रदेश को केंद्र सरकार का सहयोग भी मिल सके।
इसके अलावा एमएसएमई को बढ़ावा देने की योजना को भी आम बजट में न सिर्फ अनदेखा कर दिया गया बल्कि केंद्र सरकार ने फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में सौ फीसदी एफडीआई के लिए द्वार खोलते हुए इस सेक्टर में छोटे उद्योगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
निसंदेह अब इस सेक्टर में बड़े उद्योगों को केंद्र की ओर से विभिन्न प्रकार की मदद मिल सकेगी। केंद्रीय बजट में एमएसएमई के लिए नगद प्रवाह (लिक्विडिटी) की समस्या पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम की घोषणा की है, ताकि ऐसे उद्योगों को समय पर वित्त पोषण हो सके, लेकिन लंबे समय से वैट और अन्य करों में राहत की मांग करते रहे इन उद्योगों को टैक्स में कोई छूट सरकार ने नहीं दी है। इसके चलते हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में चलाया गया अभियान हतोत्साहित ही हुआ है।
इस तरह मिली कुछ राहत
आम बजट 2016-17 में स्टार्टअप अभियान को बढ़ावा देते हुए स्टार्टअप यूनिटों का एक ही दिन में पंजीकरण करने की सुविधा दी है। इस साल अप्रैल से मार्च, 2019 के दौरान शुरू होने वाले स्टार्टअप को 5 में से 3 वर्षों तक अर्जित किए गए लाभ पर 100 प्रतिशत कर छूट देने का फैसला बजट में दिया गया है। इसका सीधा लाभ हरियाणा सरकार युवाओं को प्रोत्साहित करके उठा सकती है।
वहीं, घरेलू विनिर्माण और ‘मेक इन इंडिया’ योजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क व उत्पाद शुल्क में कई रियायतों की घोषणा की है, जिनका हरियाणा में उद्योगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से राहत की खबर है। बजट में कुछ खास कच्चे माल जैसे धातु पुर्जे, इन्सुलेटेड वायर एवं केबल, रेफ्रिजरेटर कम्प्रेशर के कलपुर्जों, वीडियो कैमरा के कंपाउंड्स पर सीमा शुल्क घटा दिया गया है।
इसी तरह, एमएसएमई के तहत आने वाले उद्योगों में शामिल, लेथ मशीनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ खास कच्चे माल पर देय बुनियादी सीमा शुल्क को 7.5 फीसदी से घटाकर 2.5 फीसदी और एलसीडी/एलईडी टीवी पैनलों पर बुनियादी सीमा शुल्क को 10 फीसदी से घटाकर शून्य किया गया है। पेसमेकर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष कच्चे माल पर सीवीडी और एसएडी से पूरी तरह छूट दी जा रही है।
लोहे एवं इस्पात, तांबा और एल्यूमिनियम के मेटल स्क्रैप पर एसएडी को 4 फीसदी से घटाकर 2 फीसदी कर दिया गया है। देश भर में 1500 बहु-कौशल प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करने का फैसला भी बजट में किया गया है, जिससे उम्मीद बंधी है कि कुछ बहु कौशल प्रशिक्षण संस्थान हरियाणा की झोली में भी आएंगे।