चंडीगढ़। बिना सूचित किए बैंक ने उपभोक्ता की एक लाख की ओवरड्राफ्ट सुविधा को रोक दिया। इस पर उपभोक्ता ने पंजाब स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के खिलाफ केस दर्ज कराया। उसने आरोप लगाया गया कि 7 मार्च 2020 को उसने ओवरड्राफ्ट चुकता किया हुआ था, लेकिन बैंक ने 761 रुपए उसके खाते से कानूनी नोटिस के शुल्क के रूप में काट लिए। उपभोक्ता आयोग ने बैंक के इस कार्य को उपभोक्ता सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए 5000 रुपये मुआवजे के साथ कटौती की राशि को लौटाने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता धरमवीर ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया कि 10 मार्च 2017 को बैंक ने उसे 1 लाख की ओवरड्राफ्ट सुविधा दी जो 31 मार्च 2020 तक वैध थी। उसने बैंक को 7 मार्च 2020 को ही सभी बकाया चुकता कर दिया था लेकिन फिर भी बैंक ने उनके खिलाफ कानूनी नोटिस भेजा और 761 रुपये खाते से काट लिए। वहीं, बैंक ने जवाब में कहा है कि ओवरड्राफ्ट सुविधा एक वित्तीय वर्ष के लिए दी जाती है और उसका नवीनीकरण आवेदन पर निर्भर करता है। उन्होंने शिकायतकर्ता की पूर्व सेवा की स्थिति को देखते हुए उसके नियोक्ता को पत्र लिखा था।