चंडीगढ़। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज के विरोध की गूंज मंगलवार को चंडीगढ़ में भी सुनाई दी। सेक्टर-17 प्लाजा में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन कर दिल्ली के छात्र आंदोलन के साथ एकजुटता जताई जबकि सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में अधिवक्ताओं ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
सेक्टर-17 में प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नीलम थिएटर के सामने बैनर और पोस्टर लेकर विरोध जताया। प्रदर्शन में आम नागरिक और कुछ बच्चे भी शामिल हुए। छात्र संगठनों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही विसंगतियों और युवाओं के मुद्दों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और शिक्षा से जुड़े सवालों पर आवाज उठाना समय की जरूरत है।
उधर, सेक्टर-43 स्थित जिला अदालत परिसर में अधिवक्ताओं ने सभा कर कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताया। वकीलों ने मांग की कि आंदोलन के दौरान घायल छात्रों और युवाओं को उचित मुआवजा दिया जाए, दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएं तथा सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को रिहा किया जाए।
सभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर निर्णय लिया गया कि आंदोलन जारी रहने तक अधिवक्ता छात्रों को नैतिक और विधिक सहायता उपलब्ध कराते रहेंगे। इस अवसर पर मनजीत कौर संधू, पीसी कोंडल, विपिन कुमार, जीवराज, राजेश कुमार, शिव मूर्ति यादव, गुरदेव सिंह माही और करम सिंह सहित कई अधिवक्ताओं ने विचार रखे। प्रदर्शन को देखते हुए चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-17 और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी।
कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री का पुतला फूंका, इस्तीफा मांगा
चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी छात्रों के प्रदर्शन से पहले सेक्टर-17 प्लाजा में प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंककर इस्तीफे की मांग की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने आरोप लगाया कि देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के सवालों का जवाब देने के बजाय उनकी आवाज दबाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस ने पेपर लीक के मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों को कड़ी सजा और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए सख्त व्यवस्था लागू करने की मांग की।