चंडीगढ़। भगवान ने मेरी पत्नी जसपाल कौर को इस दुनिया में दूसरों की जान बचाने के लिए ही भेजा था इसलिए दुनिया से जाते हुए उसने अपना कार्य पूरा किया। यह कहना है संगरूर के रहने वाले गुरदीप सिंह दीपा का। उन्होंने जसपाल कौर का पीजीआई में अंगदान कराया है। अंगदान से मिली दोनों किडनियां और लीवर पीजीआई की प्रतीक्षा सूची में शामिल तीन मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया।
पंजाब के जिला संगरूर के गांव खीरी की रहने वाली 50 वर्षीय जसपाल कौर 18 सितंबर को वाहन की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें तत्काल सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति खराब होने पर वहां से पटियाला के राजिंदरा अस्पताल रेफर किया गया। हालत में सुधार नहीं होने पर पीजीआई लाया गया। उन्हें यहां इलाज के दौरान 21 सितंबर को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। परिजनों के निर्णय पर जसपाल का अंगदान कराया गया। अंगदाता परिवार के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए पीजीआई निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि अपने दुख को दरकिनार कर किसी की जान बचाने से ज्यादा वीरता का कार्य और कुछ नहीं हो सकता। जसपाल के परिजनों के निर्णय ने जिंदगी की जंग लड़ रहे तीन मरीजों को नया जीवन दिया है। यह अनुकरणनीय है।
अंगदान के प्रति बढ़ रही जागरूकता
पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि अंगदान को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ रही है लेकिन अब भी परिणाम बेहद संतोषजनक नहीं है। हमें सफलता के लिए व्यापक स्तर पर काम करना होगा। यह समझना होगा कि अंगदान से ऐसे मरीजों की जान बचाई जा सकती है जो अंग की विफलता के कारण जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे हैं। जसपाल कौर और उनके परिवार का निस्वार्थ भाव से लिया गया निर्णय प्रशंसनीय और सीख लेने योग्य है। ऐसे निर्णय ही समाज में बड़े बदलाव के कारण बनते हैं।