छोटी उम्र की लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न और उसके बाद गर्भ गिराने से जुड़ी याचिकाओं की बढ़ती संख्या पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ को उचित कदम उठाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने हरियाणा के एक जिले में नाबालिग बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और उसके बाद गर्भवती होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक हिदायतें जारी की हैं।
कोर्ट ने हरियाणा-पंजाब व चंडीगढ़ को आदेश दिए हैं कि वे बच्चों की उम्र के अनुसार सेक्स एजुकेशन का मॉड्यूल तैयार करें और हर शिक्षण सत्र में बच्चों को उसकी जानकारी दी जाए। कोर्ट ने कहा कि यह मॉड्यूल इसी शिक्षण सत्र के लिए तैयार नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि हर शिक्षण सत्र में लागू करने के लिए काम होना चाहिए।
हाईकोर्ट ने कहा कि सेक्स एजुकेशन और गुड टच व बैड टच की जानकारी बच्चों के लिए बेहद जरूरी है। अक्सर परिवार के ही करीबी बच्चों का यौन उत्पीड़न करते हैं, खासतौर पर लड़कियों के साथ। इसका खुलासा तब होता है जब बच्चियां गर्भवती हो जाती हैं, तब इंसाफ के लिए थानों और अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। तब तक बहुत देर हो जाती है।
कई मामलों में तो गर्भ गिराने की अनुमति भी नहीं दी सकती है। ऐसे हालात में पैदा हुई संतान की जिंदगी भी बर्बाद हो जाती है। सेक्स एजुकेशन से फायदा यह होगा कि यदि किसी बच्ची के साथ कुछ गलत हो रहा होगा तो वह समय से सचेत हो सकती है और इस बारे में अपने परिवार या शिक्षकों को जानकारी दे सकती हैं।
अभी तक सेक्स एजुकेशन के अभाव में 15 साल और उससे कम उम्र की लड़कियों के यौन शोषण के मामले या तो दबे रह जाते हैं या बच्चों की जिंदगी खराब होने के बाद घटना सामने आती है।