चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के सिलेबस से पंजाबी और सिख इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को हटाए जाने का विरोध अब सोशल मीडिया पर भी तेज होने लगा है। विद्यार्थियों ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई है। विद्यार्थियों का कहना है कि पंजाब के इतिहास और सिख परंपरा से जुड़े विषयों को सिलेबस से हटाना विद्यार्थियों को अपने इतिहास से दूर करने जैसा है। विद्यार्थी लगातार सोशल मीडिया पर रील डालकर विरोध जता रहे हैं।
विद्यार्थी पंजाबी इतिहास से जुड़े विषयों को दोबारा शामिल करने की मांग रखी। विद्यार्थियों ने इन विषयों को केवल वैकल्पिक करने के बजाय पहले की तरह अनिवार्य रखने की भी मांग की। एचओडी ने मामले पर विचार करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।
छात्रों के अनुसार संशोधित सिलेबस से गुरु नानक देव जी का जीवन और उनके समय की परिस्थितियां, पंथ की संस्थागत स्थापना, गुरु अर्जन देव जी, गुरु तेग बहादुर जी, गुरु हरगोबिंद साहिब जी, मीरी-पीरी, अकाल तख्त, मिसल, दल खालसा, महाराजा रणजीत सिंह और लाहौर राज्य, एंग्लो-सिख युद्ध, सिंह सभा आंदोलन, जलियांवाला बाग, गदर आंदोलन और पंजाबी सूबा आंदोलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी सिलेबस में जगह नहीं दी गई है।