पंजाब भू परीक्षण विधेयक (पीएलपीए) में हरियाणा सरकार द्वारा किए गए संशोधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद विरोधियों ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। विरोधियों का कहना है कि सदन में ही उन्होंने इस एक्ट में हरियाणा सरकार के संशोधन का विरोध किया था। इसके बावजूद गुमराह करते हुए सरकार ने इस एक्ट में संशोधन किया।
हरियाणा शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष एडवोकेट विजय बंसल ने कहा कि 27 फरवरी को विधानसभा में हरियाणा सरकार ने पीएलपीए में जो संशोधन बिल पारित किया है, वह गलत है। दरअसल, प्रदेश सरकार सदन की पटल पर बिल पेश करने में सक्षम नही है। उन्होंने बताया कि आज हरियाणा के 14 जिले पीएलपीए एक्ट के दायरे में हैं।
हरियाणा सरकार ने 2006 में वन नीति बनाई थी जिसमें कहा गया था कि हरियाणा में वन क्षेत्र 6 प्रतिशत है 2010 में 10 प्रतिशत किया जाएगा तथा 2020 में 20 प्रतिशत किया जाएगा। परंतु अब तक केवल मात्र 3.5 प्रतिशत ही वन क्षेत्र हरियाणा में है। पीएलपीए एक्ट में संशोधन के बाद तो वन क्षेत्र और कम हो जाएगा।
उधर, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी ट्वीट कर कहा कि भाजपा सरकार ने बिल्डर और माफिया के साथ मिलकर संशोधन बिल पास कर 119 साल पुराने एक्ट को बदला है पर सुप्रीम कोर्ट ने इस भ्रष्टाचारी निर्णय पर रोक लगा भाजपा सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। इस पर सीएम मनोहर लाल को जवाब देना चाहिए।
उधर, कांग्रेस विधायक करण दलाल व पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि सदन में ही जब ये संशोधन बिल पास किया जा रहा था, तो कांग्रेस व इनेलो विधायकों ने विरोध करते हुए बिल को एग्जामिन करने के लिए एक कमेटी बनाने की मांग की थी, लेकिन अफसरों द्वारा गुमराह किए गए सीएम तो इस बिल को पास करवाने की जिद पर अड़े थे।