हरियाणा में हुए शराब घोटाले पर विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। इसी मसले पर विपक्ष लगातार सरकार पर वार कर रहा है। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और कांग्रेस ने सरकार पर इस मामले में मिलीभगत का आरोप लगाया है। इनेलो नेता और विधायक अभय सिंह चौटाला ने आरोप लगाया कि लॉकडाउन के दौरान शराब की लाखों बोतलें अधिकारियों के साथ सरकार में बैठे लोगों ने मिलीभगत करके डिस्टलरी से निकालकर महंगे दामों पर बेच दी।
उन्होंने कहा कि एसईटी आबकारी कमिश्नर को दोषी करार दे रही है और आबकारी मंत्री उन्हें क्लीनचिट देकर सीधे सरकार को चुनौती दे रहे हैं, क्योंकि ये एसईटी मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद ही गठित हुई थी। इनेलो नेता ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान पुलिस के नाके हर तरफ लगे हुए थे फिर ये शराब की तस्करी कैसे हुई? गृहमंत्री विजिलेंस जांच के नाम पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते।
उधर, कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य एवं राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि शराब घोटाले के असली गुनहगारों और चहेते शराब माफियाओं को बचाने के लिए सरकार आबकारी और गृहमंत्री के टकराव का ड्रामा कर रही है। शराब घोटाले के असली घोटालेबाजों तक पहुंचने के लिए हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच जरूरी है।
दीपेंद्र ने कहा कि वे पहले दिन से ही इस बात की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब सारी दुनिया कोरोना से लड़ रही थी, तब हरियाणा सरकार में उच्च पदों पर बैठे लोग शराब घोटाले, रजिस्ट्री घोटाले को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के आबकारी मंत्री और गृह मंत्री खुले तौर पर शराब घोटाले में एक दूसरे पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में दोनों मंत्रियों के पद पर रहते निष्पक्ष जांच संभव नहीं, इसलिए दोनों को जांच पूरी होने तक अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार सरकार अपने ही बुने जाल में फंस गई है। शराब घोटाले को दबाने की तमाम साजिशें नाकाम हो रही हैं।