ट्राइसिटी रूट पर 700 बसों की जरूरत, फिलहाल चल रहीं 358
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक बस के जाने के बाद दूसरी बस के आने के समय (फ्रीक्वेंसी) को कम करना चाहिए। अगर परिवहन विभाग फ्रीक्वेंसी को 10 मिनट करना चाहता है तो इसके लिए 700 बसों की जरूरत होगी। अभी सीटीयू की 358 बसें ही शहर में चल रही हैं। हालांकि अगले कुछ महीनों में 40 ई-बसें और आ जाएंगी।
अंतरराष्ट्रीय मानक के अनुसार, बसों में एक तिहाई सवारियों की कमी है। शहर की सड़कों पर दौड़ रहीं बसों में औसतन 22 फीसदी सीटें ही भर पा रहीं हैं, जबकि मानक के अनुसार 60 से 70 प्रतिशत होनी चाहिए। रिपोर्ट में परिवहन विभाग के इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएम) का भी जिक्र किया गया है। कहा है कि इससे लोगों को सहूलियत हो रही है, लेकिन बसों की संख्या बढ़ेगी तभी लोग इसका लाभ ले पाएंगे।
सेप्ट यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट मिल गई है। रिपोर्ट काफी विस्तृत है, जिसे विभाग के विभिन्न अधिकारियों द्वारा पढ़ा जा रहा है। रिपोर्ट में समस्या के साथ समाधान भी दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन को लोगों के लिए और अधिक सुगम बनाने के लिए ही यह सर्वे कराया गया था। अब वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा के बाद रिपोर्ट के सुझावों पर काम किया जाएगा। - उमाशंकर गुप्ता, निदेशक, परिवहन विभाग