मौसम की मार के चलते इस बार हरियाणा में एजेंसी गेहूं खरीद के लक्ष्य से कोसों दूर है। गेहूं का आधा सीजन बीतने को है, लेकिन अभी तक प्रदेश में 32 लाख मीट्रिक टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है। जबकि पिछले साल आज की तिथि तक 44.55 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी थी। इससे अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं। मंडियों में लक्ष्य से कम गेहूं की आवक से चिंतित भारतीय खाद्य निगम और हरियाणा सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर गेहूं में सिकुड़े और टुकड़े की मात्रा 6 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक करने की मांग की है। आगामी एक दो दिनों में केंद्र इस पर फैसला ले सकता है।
मंडियों से एफसीआई पहुंच रहा हजारों क्विंटल गेहूं मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है। रोजाना हजारों क्विंटल गेहूं को वापस किया जा रहा है। मानकों के अनुसार गेहूं में 6 प्रतिशत ही टुकड़ा और सिकुड़ा हुआ दाना खरीदा जा सकता है, लेकिन इस बार इसकी मात्रा 9 से 20 प्रतिशत तक आ रही है।
एफसीआई ने प्रदेशभर की मंडियों से गेहूं के 272 सैंपल लिए थे। जांच में 132 सैंपलों में टुकड़ा और सिकुड़ा हुआ गेहूं 13.8 प्रतिशत मिला। इसी आधार पर एफसीआई ने केंद्र को पत्र लिखा है कि जल्द ही इस पर फैसला लिया जाए और छूट प्रतिशत बढ़ाई जाए। इसी आधार पर हरियाणा सरकार ने भी केंद्रीय मंत्रालय को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की मांग की है। अभी केंद्रीय मंत्रालय इस पर समीक्षा कर रहा है।
इस बार उम्मीद के मुकाबले कम गेहूं की खरीद हो पाई है। समय से पहले गर्मी के चलते अपरिपक्व और सिकुड़े हुए दानों की संख्या अधिक है। हमने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है कि सिकुड़े हुए दाने की मात्रा को 6 से बढ़ाकर 13.8 प्रतिशत किया जाए। - प्रदीप सिंह, उप क्षेत्रीय प्रबंधक, एफसीआई।
किसान को प्रति एकड़ 10 से 15 हजार का नुकसान
दाना सिकुड़ने से इस बार एक एकड़ में 4 से 5 क्विंटल कम उत्पादन हो रहा है। इस बार गेहूं उत्पादक वाले किसानों को 10 से 15 हजार रुपये प्रति एकड़ नुकसान हुआ है। इसलिए सरकार तुरंत प्रभाव से गेहूं पर 500 रुपये बोनस जारी करे। - रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।