इस पर विचार करते हुए सरकार ने ट्रांसफर ड्राइव के संबंध में कांसेप्ट नोट तैयार किया है। इसके तहत अब कर्मचारियों के बड़े स्तर पर तबादले किए जाएंगे। इससे पहले जो कर्मचारी जिस विभाग में जिस पद पर लग जाता था, बाद में उसका न तो पद बदला जा सकता था और न ही विभाग। पहली बार सरकार ने इसका सरलीकरण किया है।
तीन जिलों का दे सकेंगे विकल्प
ट्रांसफर ड्राइव में प्रत्येक कर्मचारी को तीन जिलों का चयन करने का विकल्प होगा, जहां वह स्थानांतरित होना चाहते हैं। कर्मचारी ग्रुप डी के सभी पदों की सूची में से अधिकतम 50 पदों का चयन कर सकता है, जिनके लिए वह खुद को फिट नहीं समझता है। स्थानांतरण अभियान में कर्मचारी को उसके द्वारा चुने गए तीन जिलों में से किसी एक में प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही उन पदों पर नियुक्त नहीं करने का भी प्रयास किया जाएगा जिन पर वह काम नहीं करना चाहता है। सरकार द्वारा निश्चित तिथि से 15 दिनों के भीतर पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने वाले कर्मचारी ही ट्रांसफर ड्राइव के लिए पात्र माने जाएंगे। सरकार द्वारा तैयार कांसेप्ट नोट में एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन या एक पद से दूसरे पद पर ट्रांसफर के मानदंड, सामान्य निर्देश और आवश्यक प्रक्रियाओं व विस्तृत फार्मेट की जानकारी दी गई है।
बोर्ड-निगमों और सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों को नहीं राहत
ग्रुप-डी अधिनियम के लागू होने के बाद प्रदेश सरकार के किसी भी विभाग में तैनात सभी ग्रुप-डी कर्मचारी स्थानांतरण प्रक्रिया में भाग लेने के पात्र होंगे। हालांकि, किसी भी सांविधिक निकाय, बोर्ड, निगम, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, संवैधानिक निकाय में तैनात ग्रुप-डी कर्मचारी इस अभियान में भाग लेने के पात्र नहीं हैं।
ये आ रही है दिक्कत
फिलहाल ग्रुप-डी के कर्मचारियों को जो विभाग अलॉट किए गए हैं, वह उनकी योग्यता के अनुसार नहीं है। उच्च शिक्षा प्राप्त को माली का काम दिया गया है, जबकि उसे पौधों की देखरेख की जानकारी नहीं है। बीटेक डिग्री धारक कर्मी को किसी विभाग में पानी पिलाने के लिए लगाया गया है, इसी प्रकार एमए और एमफिल डिग्री धारक को शिक्षा विभाग के बजाय अन्य विभाग में तैनात किया गया। सरकार चाहती है कि जिस कर्मचारी की जैसी योग्यता होगी, उसे उससे संबंधित ही काम दिया जाएगा, ताकि वह बेहतर प्रदर्शन कर सके।