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ऑनलाइन शिक्षा : मोबाइल हमेशा हाथ में रहने से बच्चे बने सोशल मीडिया के आदी

Sun, 21 Feb 2021 04:12 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन लगने पर ऑनलाइन शिक्षा इकलौता विकल्प बचा था। इस दौरान स्कूली बच्चों के हाथ में भी मोबाइल थमा दिए गए। अब इसका असर सामने आ रहा है।

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10 महीने मोबाइल हाथ में रहने के बाद विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग शुरू कर दिया है। इस कारण अभिभावकों और शिक्षकों में बच्चों के मोबाइल के आदी होने को लेकर चिंता बढ़ गई है।

इस बारे में स्कूल प्रबंधकों ने बताया कि दोबारा सामान्य स्कूल खुलने पर उन्होंने पाया कि विद्यार्थी मोबाइल के आदि हो गए हैं। ज्यादा देर तक स्क्रीन पर व्यस्त रहने के कारण उनमें तनाव और आलस की समस्याएं भी बढ़ गई हैं।

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अभिभावक भी स्कूलों को संदेश भेजकर बच्चों की काउंसलिंग करने के लिए बोल रहे हैं। स्कूल काउंसलर ऑनलाइन ही बच्चों के साथ अभिभावकों की भी काउंसलिंग कर रहे हैं, क्योंकि इस समय छोटे बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं, इसलिए घर पर अभिभावकों की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है। अभिभावकों को बच्चों के मोबाइल पर घंटे सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे रहे हैं।

अभिभावक इन तरीकों को अपनाएं 
  • अभिभावकों बच्चों के साथ दोस्ती करें, उन्हें हर बात गुस्से से नहीं समझाई जा सकती।
  • अभिभावक बच्चों से उनकी दिनचर्या को लेकर चर्चा करें।
  • बच्चों से पूछे कि वे मोबाइल पर क्या करते हैं और उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल को लेकर भी चर्चा करें।
  • विद्यार्थियों को सोशल मीडिया को लेकर जागरूक करें और उनके घंटे सुनिश्चित करें।
  • बच्चों की ओर से गलत प्रभाव की वीडियो देखने के केस भी सामने आ रहे हैं, ऐसे में अभिभावकों को बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार उन्हें सोशल मीडिया चैनल के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
  •  अभिभावक मोबाइल पर बच्चों को कार्टून और प्रेरक चीजें देखने के लिए प्रेरित करें और इसके लिए घंटे सुनिश्चित करें।
  • ऑनलाइन पढ़ाई के कारण मोबाइल समय की जरूरत थी, अब अगर अचानक बच्चों के हाथ से मोबाइल लेंगे तो उनमें तनाव बढ़ेगा या वे उसकी ओर ज्यादा आकर्षित होंगे।
  • अभिभावक कोशिश करें कि उन्हें स्क्रीन के बजाय किताब से पढ़ाया जाए या उन्हें नोट्स के प्रिंट निकलवाकर दें। ( मनोचिकित्सक डॉ. दमनजीत कौर) 
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मोबाइल खेलों के आदी हो रहे विद्यार्थी

अभिभावकों के संदेश आ रहे हैं कि विद्यार्थी मोबाइल पर पढ़ने के बजाय खेलों और सोशल मीडिया पर अधिक ध्यान देते हैं। स्कूल काउंसलर बच्चों की ऑनलाइन काउंसलिंग कर रहे हैं। अभिभावकों को भी स्कूल बुलाकर और ऑनलाइन दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं, क्योंकि कई अभिभावक टेक्नोलॉजी के मामले में बच्चों से पीछे हैं। ऐसे में कई बार वे नहीं समझ पाते कि उनका बच्चा मोबाइल पर क्या कर रहा है या उसे कैसे नियंत्रित किया जाए। - लुइस लोपेज, प्राचार्य, सेंट स्टीफन स्कूल।

अभिभावकों को भी कार्यशाला आयोजित कर किया जा रहा जागरूक
स्कूल में हम अभिभावक दिवस मना रहे हैं। इसमें अभिभावकों को स्कूल बुलाकर उनके लिए छोटी छोटी कार्यशाला आयोजित की जाती है। इस दौरान अभिभावक को बच्चों को घर पर अनुशासित करने, उनके पढ़ाई और खेल के घंटे तय करने, मोबाइल सिर्फ पढ़ाई के लिए उनके हाथ में देना, स्क्रीन समय कम करने के लिए शारीरिक गतिविधियों में शामिल करवाना जैसी बातें सिखाई जा रही हैं। कार्यशाला के दौरान अभिभावकों ने स्क्रीन समय बढ़ने को लेकर चिंता जताई थी। हम अभिभावकों को निर्देश दे रहे हैं कि वे खुद को भी सोशल मीडिया को लेकर अनुशासित करें, क्योंकि घर के पर्यावरण का बच्चे पर बहुत असर पड़ता है। - अनुजा शर्मा, प्राचार्या , डीएवी स्कूल - 15।

स्कूल में बच्चों के मोबाइल पर लगाया प्रतिबंध
अभी कई कक्षाओं के विद्यार्थी स्कूल आ रहे हैं। हमने स्कूल में विद्यार्थियों के मोबाइल लाने पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया है। उन्हें फिर से किताबों से पढ़ने के लिए आदत डाली जा रही है। समय -समय पर स्कूल काउंसलर ऑनलाइन विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी दिनचर्या और आदतों को लेकर बातचीत कर उन्हें मार्गदर्शन दे रहे हैं। - सीमा बिजी, प्राचार्या, मोतीराम स्कूल।
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