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ऑनलाइन क्लास: विद्यार्थियों को क्लासरूम की तरह समझाना थोड़ा मुश्किल, पर पढ़ाई भी जरूरी है

Tue, 07 Jul 2020 12:46 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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संवाद न्यूज एजेंसी। ऑनलाइन क्लासेज के माध्यम से बच्चों ही नहीं उनके माता-पिता भी ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ रहे हैं। ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर बच्चों का उत्साह भी बढ़ने लगा है। उन्हें टीचर्स द्वारा प्रोजेक्ट भी दिए जा रहे हैं, साथ ही रचनात्मक कार्यों से भी जोड़ा जा रहा है लेकिन हर चीज के 2 पहलू होते हैं।
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ऑनलाइन क्लासेज जहां बच्चों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं, वहीं इसके कुछ नुकसान भी सामने आ रहे हैं। फायदा यह है कि संकट के वक्त भी शिक्षा जारी है। पैरेंट्स को भी पता चल रहा है कि उनके बच्चों को पढ़ाई में कहां दिक्कत आ रही है। नुकसान यह है कि जो चीजें समझ में नहीं आती हैं, उसे क्लासरूम की तरह विद्यार्थियों को समझा पाना टीचरों के लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा है।

वीडियो से विद्यार्थियों को गहराई तक नहीं समझा सकते
ऑनलाइन क्लास में वीडियो के माध्यम से विद्यार्थियों को गहराई तक नहीं समझा सकते। वीडियो में सिर्फ आप बता सकते हैं लेकिन यह नहीं समझा जा सकता कि बच्चे को कितना समझ में आया। अभिभावकों व विद्यार्थियों को नेटवर्किंग और डाउनलोडिंग जैसी समस्या भी आती है।
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कई बार नेटवर्क कमजोर होने की वजह से वीडियो डाउनलोड नहीं हो पाते। पोर्टल पर वीडियो लिंक डालने के साथ टीचर गूगल मीट के माध्यम से लेक्चर भी देते हैं। विद्यार्थियों से फीडबैक के रूप में उनसे होमवर्क मंगवाया जाता है लेकिन इस संकट के समय ऑनलाइन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
- सुनीता ठाकुर, प्रिंसिपल, आदर्श पब्लिक स्कूल-सेक्टर 20

बच्चे के दिमाग को पढ़ना थोड़ा मुश्किल

ऑनलाइन क्लास में स्टूडेंट्स के दिमाग और हाव-भाव पढ़ना मुश्किल होता है। कई बार अभिभावकों के मौजूद नहीं होने पर बच्चे क्लास नहीं लगा पाते। ऐसे में उन्हें शाम को अतिरिक्त समय देना पड़ता है। कई अभिभावकों के एरिया में नेटवर्क बड़ी समस्या है। विद्यार्थियों को कांसेप्ट अच्छे से समझाए जा सके, इसके लिए हम टर्न वाइज स्कूल जाकर ब्लैकबोर्ड की सहायता से लेक्चर ले रहे हैं।
- रीना गुलेरिया, टीचर, आदर्श पब्लिक स्कूल-सेक्टर 20

कई अभिभावकों को भी समझाना पड़ता है
कुछ अभिभावकों के पास एक ही स्मार्टफोन है, ऐसे में जब वो काम पर बाहर चले जाते हैं तो बच्चे क्लास नहीं लगा पाते। वहीं कई बार हमारी तरफ से भी नेटवर्किंग की समस्या आ जाती है। जूनियर क्लास के बच्चों के साथ उनके अभिभावक भी बैठते हैं। कई अभिभावक कम पढ़े लिखे होते हैं तो उन्हें ऑनलाइन क्लास में अक्षरों के उच्चारण को समझाना पड़ता है। अधिकतर पैरेंट्स गंभीर हैं। वह बच्चों का होमवर्क चेक कर टीचरों को भेज रहे हैं।
- हेमलता आनंद, टीचर, आदर्श पब्लिक स्कूल - सेक्टर 20

मोटिवेशनल कहानियां सुनाकर बढ़ाते हैं उत्साह
स्कूल की तरफ से 35 मिनट की एक क्लास ली जाती है। कुल सभी विषयों की मिलाकर 3 क्लास लग रही हैं। बीच में जब थकान होती है तो टीचर ब्रेक भी देते हैं। इसके अलावा टीचर कहानियां और आर्ट एंड क्राफ्ट गतिविधियों से भी कई टॉपिक समझाते हैं। कई टीचर मोटिवेशनल कहानियां भी सुनाते हैं, ताकि बच्चों का उत्साह बना रहे है।
- सृष्टि, विद्यार्थी, कक्षा-7 , आदर्श पब्लिक स्कूल-सेक्टर 20
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हमें कोई दिक्कत नहीं आई

हमारे पास लैपटॉप और 2 स्मार्टफोन हैं तो ऑनलाइन क्लास में लगाने में अब तक कोई समस्या नहीं आई है। वहीं बेटी की क्लास के समय मैं बीच में जाकर चेक कर लेती हूं कहीं कैमरा या माइक ऑफ तो नहीं है। इसके बाद हम खुद होमवर्क की कॉपी चेक करते हैं कि टीचर की तरफ से क्या करवाया जा रहा है। स्कूल की तरफ से क्लास का पूरा शेड्यूल बच्चे की सहूलियत के हिसाब से बना हुआ है।
- अनिता गरेजा, अभिभावक, सेक्टर-20 ए

एक साथ दो बच्चों को आनलाइन पढ़ाना मुश्किल
हमारे दो बच्चे हैं। दोनों की ऑनलाइन क्लास चल रही है। बेटी चौथी क्लास में हैं, उसकी दो किताबें नहीं मिल रहीं, जिसके कारण उसकी पढ़ाई बाधित हो रही है। वह अपना होम वर्क व रिवीजन नहीं कर पा रही। इसके साथ दो बच्चों को एक साथ ऑनलाइन पढ़ाना भी मुश्किल। बड़ी बेटी के साथ दिक्कत नहीं आती, मगर छोटी बेटी के साथ बैठना पड़ता है।
- शालू, अभिभावक सेक्टर 30

साथ में दोस्त नहीं होने पर होती है बोरियत
ऑनलाइन क्लास में कोई समस्या नहीं आ रही है। कई बार लिखित काम ज्यादा हो जाता है, जिसके कारण थोड़ा वर्क प्रेशर लगता है। रेगुलर क्लासेज में दोस्त भी मौजूद रहते थे तो थोड़ा रुचिकर था। अब वीडियो के माध्यम से ही सब कनेक्ट रहते हैं तो नेचुरल फील नहीं आती। इसके कारण कई बार आनलाइन बोरिंग हो जाता है।
- सत्यम बंसल, विद्यार्थी, कक्षा -6 , आदर्श पब्लिक स्कूल - सेक्टर 20
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