सरकारी सेवाओं को समय पर लोगों तक पहुंचाने के लिए चंडीगढ़ में एक नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है। अगर आपका कोई काम समय पर नहीं होता है तो विभागों के चक्कर काटने के बजाय ऑनलाइन शिकायत की जा सकेगी। अगर फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो ऑटो अपील सिस्टम के माध्यम से शिकायत अपने आप ही वरिष्ठ अधिकारी को ट्रांसफर हो जाएगी। उन्हें भी एक तय समय में मामले का निपटारा करना होगा।
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वर्तमान में 31 विभागों की 441 सार्वजनिक सेवाओं को राइट टू सर्विस एक्ट के अंतर्गत अधिसूचित किया गया है। इसका अर्थ है कि इन सभी सेवाओं के लिए तय समय निश्चित किया गया है। अगर कोई विभाग उससे ज्यादा समय लगा देता है तो आवेदन के पास अधिकार होता है कि वह अपने मामले को लेकर फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी के पास जा सकता है। अगर वहां से भी सुनवाई नहीं होती है तो वह सेकेंड अपीलेट अथॉरिटी के पास जा सकता है। ज्यादातर मामलों में यह विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी होता है। अभी इन दोनों जगहों पर आवेदक को खुद जाकर शिकायत देनी पड़ती थी और बार-बार पता करना पड़ता था कि उसके शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई।
चंडीगढ़ राइट टू सर्विस कमीशन अब इसी प्रोसेस को ऑनलाइन करने पर काम कर रहा है कि समय पर काम नहीं होने पर व्यक्ति घर बैठे अपील कर सके। यह पहले फेज में होगा। इसको लेकर विभिन्न विभागों के साथ चंडीगढ़ आरटीएस आयोग के मुख्य आयुक्त डॉ. महावीर सिंह की बैठक भी हो चुकी है। इसके लागू होने के बाद ऑटो अपील सिस्टम को भी लागू किया जाएगा। जिसके तहत अगर फर्स्ट अपीलेट अथॉरिटी ने समय पर सुनवाई नहीं की एक तय समय के बाद अपने आप सेकेंड अपीलेट अथॉरिटी के पास मामला चला जाएगा।
कितनों को सेवा मिली, इसका भी रिकॉर्ड होगा तैयार
राइट टू सर्विस कमीशन हर महीने रिकॉर्ड रखता है कि विभाग के पास कितनी शिकायतें आईं और कितनी शिकायतों का विभाग ने समय पर निपटारा किया और कितनी लंबित है। चीफ कमिश्नर ने विभागों को अब निर्देश दिया है कि सिर्फ निपटारे का रिकॉर्डिंग नहीं, बल्कि यह रिकॉर्ड भी बनाया जाना चाहिए कि जिन लोगों ने शिकायत ही दी, उनमें से कितने लोगों को सेवा मिली है। यह रिकॉर्ड इसलिए तैयार किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जिन कामों के लिए लोग शिकायत कर रहे हैं, वे सही तरीके से पूरे हों, न कि केवल विभाग द्वारा शिकायतों का निपटारा करके पूर्ति की दिखावट की जाए। इसका उद्देश्य यह है कि हर विभाग अपनी सेवाओं को समय पर और प्रभावी रूप से प्रदान करें, ताकि लोगों को वास्तविक समाधान मिले।
ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने का प्रयास
देश के 7 राज्यों के अलावा चंडीगढ़ एकमात्र केंद्र शासित प्रदेश है, जहां आरटीएस आयोग स्थापित किया गया है। वर्तमान में 31 विभागों की 441 सार्वजनिक सेवाएं अधिसूचित है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को समय पर और प्रभावी तरीके से सेवाएं मिलें, विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को। आयोग का लक्ष्य यह है कि सरकारी सेवाएं सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहें, बल्कि इनकी समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हो, ताकि नागरिकों को लंबी वेटिंग लिस्ट और भ्रष्टाचार से बचाया जा सके। इसके साथ ही यह प्रयास 'ईज ऑफ लिविंग' को बेहतर बनाने के लिए है, जिससे लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो और वे सरकारी सेवाओं के लिए संघर्ष न करें।
सभी सेवाओं के एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण को लागू करने पर काम किया जा रहा है। इसके बाद ऑटो अपील सिस्टम (एएएस) पर काम होगा। साथ ही आयोग ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक भी करेगा ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकें। -
डॉ. महावीर सिंह, चीफ कमिश्नर, चंडीगढ़ राइट टू सर्विस कमीशन