एसआईटी ने मंगलवार को बहिबल कलां गोलीकांड केस के मुख्य आरोपी और मोगा के पूर्व एसएसपी चरणजीत सिंह शर्मा की पायलट जिप्सी पर फायरिंग करके झूठे सबूत गढ़ने के आरोप में फरीदकोट निवासी सुहेल सिंह बराड़ को गिरफ्तार किया। बहिबल कलां गोलीकांड में घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को दो सिख नौजवानों की मौत हो गई थी जो बरगाड़ी बेअदबी मामले के विरोध में सिख जत्थेबंदियों द्वारा दिए जा रहे शांतिपूर्ण धरने में शामिल थे। उस समय मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों ने जिप्सी पर फायरिंग के निशान का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि घटना के समय प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ियों पर फायरिंग की थी जिसके बचाव में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी थी।
एसआईटी ने अपनी पड़ताल में पाया है कि गोलीकांड की घटना के बाद अपना बचाव करने के लिए आरोपी पुलिस अधिकारियों ने झूठी कहानी गढ़ी थी और सुहेल सिंह बराड़ ने जिप्सी को फरीदकोट स्थित अपने घर लाकर उस पर फायर किया था। एसआईटी के मुख्य जांचकर्ता आईजी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपी सुहेल सिंह बराड़ को बुधवार अदालत में पेश करके रिमांड पर लिया जाएगा। साथ ही जिप्सी पर झूठी फायरिंग मामले में केस के सह आरोपी एसपी बिक्रमजीत सिंह की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।
एसआईटी पड़ताल में उठा झूठी कहानी से पर्दा
एसआईटी ने पिछले साल अपनी पड़ताल के दौरान आरोपी पुलिस अधिकारियों की झूठी कहानी से पर्दा उठा दिया था। आरोपियों के अनुसार घटना के समय जब पुलिस पार्टी द्वारा धरनाकारियों को समझाया जा रहा था तो उस समय मोगा के तत्कालीन एसएसपी चरणजीत शर्मा की पायलट जिप्सी पर 12 बोर की गन से फायरिंग हुई थी और पुलिस को अपने बचाव में गोलियां चलानी पड़ी।
फायरिंग से जिप्सी पर 18 निशान पड़ गए थे। एसआईटी ने जब इन तथ्यों को खंगाला तो सामने आया कि पायलट जिप्सी पर पुलिस अधिकारियों ने खुद ही 12 बोर की गन से फायरिंग की थी। एसआईटी के अनुसार घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को ही यह जिप्सी सुहेल सिंह बराड़ के घर लाई गई और वहां पर उस पर फायर किए गए थे।