चार वर्ष पुराने हत्या के मामले में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी (डीएलएसए) ने मृतक के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला दिया है। जानकारी के अनुसार 5 अगस्त को जिला अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाकर बाल गृह भेज दिया था।
साथ ही दोषी पर 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया था। इनमें से 45 हजार रुपये पीड़ित परिवार को दिए गए थे। अदालत ने मृतक के परिवार को अतिरिक्त राशि देने का फैसला भी सुनाया था। मृतक के परिजनों के बयान दर्ज करने के बाद डीएलएसए के सेक्रेटरी और सीजेएम अशोक कुमार मान ने मुआवजा स्कीम के तहत 10 लाख रुपये देने का फैसला सुनाया।
जानकारी के अनुसार 2015 में सेक्टर-42 निवासी और ढाबा मालिक महिपाल की हत्या कर दी गई थी। यह हत्या ढाबे पर ही काम करने वाले नाबालिग ने की थी। हत्या के 20 दिन पहले ही आरोपी को काम पर रखा गया था। ढाबे पर महिपाल का छोटा बेटा भी काम करता था। 29 जून को छोटे बेटे और आरोपी के बीच मारपीट हो गई थी जिसके बाद वह नौकरी छोड़कर चला गया।
झगड़े के दौरान महिपाल और आरोपी में भी बहस हुई थी। 30 जून को महिपाल ढाबा बंद करके बिजली दफ्तर में सोने चला गया। अगली सुबह जब महिपाल का बड़ा बेटा ईश्वर उससे मिलने आया तो देखा कि वह खून से लथपथ पड़ा हुआ था। महिपाल के मुंह और गले पर चाकू के निशान थे। इसके बाद ईश्वर ने मामले की सूचना सेक्टर- 36 थाना पुलिस को दी थी। लगभग 2 महीने बाद पुलिस ने आरोपी नाबालिग को डिब्रूगढ़ से गिरफ्तार किया था।