पंजाब में नशे की चपेट में केवल पुरुष या नौजवान ही नहीं, बल्कि महिलाएं भी हैं। पीजीआई द्वारा सूबे के कई घरों में जाकर किए गए सर्वे में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है। सर्वे के अनुसार प्रदेश में 31 लाख पुरुष और एक लाख महिलाएं नशे की आदी हो चुकी हैं। महिलाएं नशे के तौर पर हेरोइन, स्मैक, अफीम, पोस्त और भुक्की का इस्तेमाल करने लगी हैं। नशे की जद में घरेलू, कामकाजी महिलाएं ही नहीं, स्कूल-कालेज में पढ़ने वाली लड़कियां भी हैं।
पीजीआई की रिपोर्ट ‘पंजाब में नशे के इस्तेमाल और उस पर निर्भरता की महामारी : घरेलू सर्वे के राज्यव्यापी प्रतिनिधि नमूने के परिणाम’ में कहा गया है कि पंजाब में लगभग 41 लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने जीवन में कभी न कभी (वैध या अवैध) नशीले पदार्थों को चखा है। वहीं, नशे के आदी हो चुके 32 लाख लोगों में से करीब एक लाख महिलाएं हैं। सर्वे में शराब और तंबाकू को जहां वैध नशा करार दिया गया है वहीं अवैध नशे में ओपियाड (अफीम , हेरोइन, स्मैक व भुक्की), कैनाबिनोइड (भांग के पौधे से निर्मित नशीला पदार्थ), दर्द की दवाएं, उत्तेजक दवाएं और शांत करने वाली दवाएं शामिल हैं।
सर्वे में कहा गया है कि राज्य में हेरोइन, स्मैक, अफीम और भुक्की जैसे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल आम हो चुका है। 2,02,817 पुरुष और 10,658 महिलाएं नशीले पदार्थों पर जीवन भर के लिए निर्भर पाए गए। खास बात यह है कि इनमें 1,56,942 पुरुषों ने हाल ही में ओपियाड तत्वों की लत लगा ली है जबकि ऐसी महिलाओं की संख्या साढ़े दस हजार के करीब सामने आई है।
इलाज के लिए खुलकर सामने नहीं आ पातीं महिलाएं
पीजीआई के साइकेट्री विभाग के डा. बीएन सुबोध का कहना है कि कई महिलाएं ड्रग्स को अब छोड़ भी नहीं सकती। यह बेहद चिंताजनक है। दूसरी ओर नशे के नए आदी हुए पुरुषों की संख्या फिलहाल जीवन भर के लिए नशे पर निर्भर हो चुके पुरुषों की तुलना में कम है। ऐसे पुरुषों को ड्रग्स से दूर करना बहुत जरूरी है।
इसके अलावा नशे की आदी ज्यादातर महिलाएं सामाजिक ढांचे के कारण इलाज के लिए खुलकर सामने भी नहीं आ पातीं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि नशे की आदी हो चुकी महिलाओं की संख्या सर्वे के आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है। सर्वे में महिलाओं के इलाज के लिए अलग से सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया गया है।
नशेड़ी पतियों के कारण लगी लत
सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि कुछ महिलाओं को उनके नशेड़ी या शराबी पतियों के कारण लत लगी। वहीं स्कूल-कालेज में पढ़ने वाली लड़कियों ने अपने सहपाठी युवकों से नशीले पदार्थ आसानी से मिलने के कारण इनका सेवन शुरू कर दिया।