सारथी के 1700 छात्र स्वयंसेवकों ने रचा सेवा का नया रिकॉर्ड
मरीजों की राह आसान, बुजुर्गों और दिव्यांगों को मिला सहारा
प्रो. विवेक लाल बोले– इमारत नहीं, इंसान संस्थान को मजबूत बनाते हैं
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। इलाज सिर्फ दवाओं से नहीं, संवेदना से भी होता है...इस बात को पीजीआई के युवाओं ने सच कर दिखाया है। संस्थान की स्वयंसेवी पहल सारथी ने 100,000 घंटे की निःस्वार्थ सेवा पूरी कर देशभर के सरकारी अस्पतालों के लिए एक मिसाल कायम की है।
6 मई 2024 से शुरू हुई इस पहल से अब तक करीब 1700 छात्र जुड़ चुके हैं जिन्होंने औसतन 60-60 घंटे सेवा दी। इन घंटों में मरीजों को रास्ता दिखाने से लेकर बुजुर्गों और दिव्यांगों की मदद, इमरजेंसी में सहयोग, ओपीडी और वार्डों में व्यवस्था संभालने तक हर वह काम शामिल है जो इलाज के दौरान इंसान को इंसान का सहारा देता है। निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि एक लाख घंटे की यह सेवा बताती है कि संस्थान सिर्फ इमारतों और मशीनों से नहीं बल्कि समय और संवेदना देने वाले नागरिकों से मजबूत होते हैं। वहीं, उप निदेशक प्रशासन पंकज राय ने बताया कि सारथी को स्पष्ट नियमों और प्रशिक्षण के साथ चलाया जा रहा है, ताकि सेवा अनुशासित और प्रभावी बनी रहे।