अबैन फेस्टिवल में दौड़ते युवा।
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रविवार को चंडीगढ़ में तीन दिवसीय अर्बन फेस्टिवल का समापन हो गया। सुबह साइक्लिंग के बाद दोपहर में बच्चों ने संसद में बहस कर भविष्य के नेता बनने की नींव रखी। वहीं शाम को अंधेरा होते ही आसमान में स्काई लालटेन उड़ाकर अपने सपनों को नई ऊंचाई देने का संदेश दिया। तीन दिन बच्चों ने खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों का आनंद लिया तो दूसरी और क्रिकेट में लोगों ने दो-दो हाथ आजमाए।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह दौड़ और साइक्लिंग के साथ हुई। ओपन हैंड में आयोजित बाल संसद में बच्चों को उनके अधिकारों से अवगत कराया गया। संसद में 80 स्कूलों से करीब 1500 बच्चों ने भाग लिया। चंडीगढ़ की समाज सेवी संस्था के सदस्यों व अन्य व्यक्तियों ने मिलकर शहर में मानव सहयोग का जश्न मनाते हुए मार्च किया।
मानवीय रिश्तों की खूबसूरती को दिखाते समूह में शामिल सभी लोगों ने जन मार्ग से टूरिजम इंर्फोमेशन सेंटर सेक्टर-1 तक मार्च किया। जीएमएसएसएस सेक्टर-10 के बच्चों द्वारा योग की प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति में 11वीं, 10वीं कक्षा के 31 विद्यार्थियों ने चक्र, भुजंग, वृक्ष, वक, नटराज सहित कई आसन किए। योग अध्यापिका मंजू ने बताया इसे तैयार करने में उन्हें 6 माह का समय लगा।
नुक्कड़ नाटक से बताया कुरीतियों का असर
बच्चों ने समाज में पैर पसार रही कई सामाजिक कुरीतियों को उजागर करते नुक्कड़ नाटक, ग्रुप डांस और स्किट पेश की। इस दौरान दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने अपनी दिनचर्या से जुड़े मुद्दों पर पैनल चर्चा के दौरान पैनलिस्टों से सवाल जवाब भी किए और उनका समाधान प्राप्त किया। अंत में तमन्ना को जोन एक, सुमन को जोन दो, विकास को जोन तीन और नेहा को जोन 4 से बेस्ट लीडर के रूप में सम्मानित किया गया।
कूड़ा उठाकर बच्चों को मिलती है वर्दी
एक तरफ चंडीगढ़ अर्बन फेस्टिवल में जहां बच्चे अपने अधिकारों की आवाज उठाते दिखे, वहीं दूसरी तरफ कुछ बच्चे कचरा उठा रहे थे। पांच वर्षीय पल्लवी ने बताया कूड़ा उठाने से हमारे स्कूल की वर्दी आती है। कार्यक्रम में उपस्थित समाज सेवक गजेंद्र नौटियाल ने कहा बाल श्रम को खत्म करने के लिए सभी को आगे आना होगा। सामाजिक संस्थाओं को आम नागरिकों के सहयोग की जरूरत है।