चंडीगढ़। शहर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। संक्रमण की रफ्तार के लिए इस बार भी ओमिक्रॉन ही जिम्मेदार है। इसकी पुष्टि संक्रमित मरीजों की जीनोम सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट से हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 5 अप्रैल को नेशनल सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल को भेजे गए 26 नमूनों में से 19 में ओमिक्रॉन के अलग अलग वेरिएंट की पुष्टि हुई है। राहत की बात यह है कि मिलने वाले एक भी वेरिएंट गंभीर नहीं हैं। हालांकि मरीजों की बढ़ती संख्या और ओमिक्राॅन की पुष्टि ने स्वास्थ्य विभाग की परेशानी बढ़ा दी है। बचाव के लिए विभाग ने जांच की दर बढ़ाकर 800 तक कर दी है। स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग का कहना है कि संक्रमण की बढ़ती रफ्तार के बीच हमें बचाव के मानकों का पालन सुनिश्चित कर समझदारी दिखानी होगी जिससे महामारी फिर से हमें प्रभावित न कर सके। जिन लोगों ने टीका लगवा लिया है वे भी मानकों का कड़ाई से पालन करें, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता तो उन्हें संक्रमण की गंभीरता से बचा लेगी, लेकिन उनके संपर्क में आने वाले बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति के ज्यादा प्रभावित होने का खतरा बरकरार होगा।
इनसेट-
शहर में कोरोना की स्थिति
संक्रमण दर- 8.98 प्रतिशत
सक्रिय मरीज- 327
प्रतिदिन हो रही जांच- 600 से 700
अब तक मौतें- 1184
इनसेट
इस साल अब तक तीन की गई जान
- 21 फरवरी को सेक्टर-42 निवासी 81 साल के मरीज की मोहाली के एक निजी अस्पताल में मौत हुई।
- 26 मार्च को 88 साल के एक मरीज की जीएमएसएच-16 में इलाज के दौरान मौत हुई।
- 7 अप्रैल को सेक्टर-15 निवासी 92 साल के एक मरीज की मोहाली के एक निजी अस्पताल में मौत हुई।
नोट- इन मौतों से पहले 26 अगस्त 2022 को एक संक्रमित मरीज ने दम तोड़ा था।
इनसेट-
एनसीडीसी ने नमूने लेने से किया इनकार
नेशनल सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल ने चंडीगढ़ समेत पंजाब, हरियाणा, हिमाचल के जांच के नमूनों लेने से इनकार कर दिया है। कारण उनके पास जांच के लिए रसायन (रीजेंट) का उपलब्ध न होना है। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने 65 नमूनों को एनसीडीसी की बजाय एनआईटी को भेजा है।
इनसेट-
जीनोम सिक्वेंसिंग की अब तक की रिपोर्ट
5 अप्रैल को कोरोना संक्रमित 26 मरीजों के नमूने नेशनल सेंट्रल फॉर डिजीज कंट्रोल को भेजे गए थे। इनमें से 19 में ओमिक्रॉन के अलग-अलग वेरिएंट की पुष्टि हुई है। जबकि 5 नमूनों की रिपोर्ट लंबित है व दो की सामान्य है। 21 अप्रैल को 65 मरीजों के नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी नई दिल्ली को भेजे गए हैं।