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OMG: साढ़े 5 साल का ‘बली’, खाने में 'खली'

Sat, 28 Feb 2015 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, करनाल
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पंजाब के मोगा से एनडीआरआई में पहुंचा साढ़े साल साल का बली (झोटा) लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। किसान भाइयों के साथ युवाओं में भी बली को देखने की होड़ लगी रही। हो भी क्यों न, ऐसा शारीरिक सौष्ठव बहुत कम जो देखने के लिए मिलता है। बली के इस शारीरिक सौष्ठव के लिए उसके मालिक उस पर रोजना तीन हजार रुपये खर्च करते हैं।
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मालिक जय सिंह बली को रोजाना 15 लीटर दूध पिलाते हैं। उसके लिए दूध की कमी न हो, इसलिए उन्होंने 40 लीटर की दूध वाली एक गाय उसके लिए पाली हुई है। बली के पास इस समय बली से छोटे करीब 10 कटड़े हैं।

उन सभी को दूध पिलाने के लिए उन्होंने दो गाय रखी हुई हैं। रोजाना एक पेटी सेब, 10 किलो गाजर और इतनी ही हरी मटर बली की खुराक में शामिल हैं। इसके आलावा रोजना के भोजन में सोयाबीन, छोले, मक्की, गेहूं और हरी घास शामिल है।
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हर माह तीन लाख का बिकता है सीमन

बली का सीमन किसानों को 300 रुपये में बेचा जाता है। यदि डॉक्टर लेने आते हैं, तो उन्हें यह 250 रुपये प्रति भैंस बेचा जाता है। बली का केवल सीमन ही बेचा जाता है। उसे तौर पर नहीं छोड़ा जाता।

जय सिंह ने बताया कि बली अभी तक पंजाब के मुकस्टर में लगे राष्ट्रीय पशु मेले सहित कई अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लाखों रुपये का पुरस्कार जीत चुका है।

सीमन बेचकर ही वे प्रतिमाह तीन लाख रुपये बली से कमा लेते हैं। इसीलिए वह बली को किसी भी कीमत पर बेचने के लिए तैयार नहीं है। जय सिंह ने बताया कि बली के छह से 8 माह के बच्चे को ढाई से तीन लाख रुपये में बेचा जाता है।

जय सिंह ने खुद बली को 3 लाख रुपये में खरीदा था। जय सिंह ने बताया कि युवराज भी बली का ही भाई है। जालंधर की लैबोरेटरी में जांच के बाद ही बली के सीमन को अनुमति दी गई है।
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मैट पर सोता है, गोबर करता है जमीन पर

बली गद्देदार मैट पर सोता और बैठता है। लेकिन, जब उसे गोबर या पेशाब करना हो, तो वह हरकतें करने लगता है। इसके बाद उसे मैट से उतार दिया जाता है। इतना ही नहीं बली को डेटोल साबुन और दही से नहलाया जाता है।

बली को गर्मी से बचाने के लिए पानी की अलग व्यवस्था की गई है। सारा दिन वह इसी में पड़ा रहता है। उसे पानी से तभी निकाला जाता है, जब उसे भूख लगती है। रोजाना पांच किलोमीटर की सैर करने वाले बली की मां ने साढ़े 26.5 लीटर दूध देकर अपना लोहा मनवाया है।
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