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चौटाला पिता-पुत्र को पेंशन, अब हाईकोर्ट में नहीं, यहां होगा फैसला

Fri, 22 Jul 2016 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ओम प्रकाश चौटाला (फाइल फोटो)
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सजायाफ्ता चौटाला पिता-पुत्र को पेंशन दिए जाने का मामला गरमा गया है। अब विधानसभा सचिव केस का फैसला करेंगे। ऐसे में हरियाणा विधानसभा में कभी मुख्यमंत्री तो कभी विधायक के रुतबे के साथ कदम रखने वाले इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला को इसी विधानसभा परिसर में अब कैदी के रूप में पेशी के लिए हाजिर होना पड़ सकता है।
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दरअसल, विधानसभा सचिव ने तिहाड़ जेल के सुपरिंटेंडेंट को पत्र लिखकर आगामी 10 अगस्त से पहले ओम प्रकाश चौटाला और अजय सिंह चौटाला को विधानसभा में पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।

विधानसभा सचिव ने यह फैसला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से एडवोकेट एचसी अरोड़ा की जनहित याचिका पर दिए उन निर्देशों के तहत लिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने विस सचिव को 12 अगस्त तक सजायाफ्ता पूर्व विधायकों को पेंशन दिए जाने के मामला हल करने को कहा है।
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विधानसभा के उप सचिव ने सचिव की ओर से तिहाड़ जेल के सुपरिंटेंडेंट को 19 जुलाई को लिखे पत्र में कहा है कि वे पूर्व विधायकों ओमप्रकाश चौटाला और अजय सिंह चौटाला को 10 अगस्त से पहले किसी भी उपयुक्त दिन हरियाणा विधानसभा सचिव के सामने पेश करें, ताकि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष 6 फरवरी, 2016 को दी गई रिप्रेजेंटेशन के मद्देनजर जारी निर्देशों पर फैसला लिया जा सके।
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हाईकोर्ट ने दिए थे विधानसभा सचिव को निर्देश

कोर्ट
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के जस्टिस एके मित्तल और जस्टिस राज राहुल गर्ग की डिवीजन बेंच ने गत 23 मई को एडवोकेट अरोड़ा की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा विधानसभा सचिव को निर्देश दिए थे कि वे याचिकाकर्ता की ओर से दी गई रिप्रेजेंटेशन के मद्देनजर भ्रष्टाचार निरोधक कानूनों के अनूसार दोनों पूर्व विधायकों को दी जा रही पेंशन रोकने के बारे में फैसला लें।

विधानसभा सचिव को यह निर्देश भी दिए गए कि वे एडवोकेट अरोड़ा को व्यक्तिगत तौर पर सुनें और एक स्पीकिंग आर्डर पास करें। हाईकोर्ट ने यह कार्रवाई दो माह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया था कि चौटाला पिता-पुत्र को दिल्ली की अदालत ने 16 जनवरी, 2013 को दोषी ठहराते हुए दस साल की सजा सुनाई थी।

सजा के खिलाफ 5 मार्च, 2015 को चौटाला पिता-पुत्र की अपील को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया था।
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याचिका में दिया कानूनों का हवाला

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याचिकाकर्ता एडवोकेट अरोड़ा ने हाईकोर्ट में हरियाणा विधानसभा (सदस्यों के वेतन, भत्ते एवं पेंशन) एक्ट 1975 के सेक्शन 7-ए (1-ए) का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत अयोग्य ठहराया जा चुका सदस्य, नियमों की उपधारा (1) के अनुसार अयोग्य ठहराए जाने की अवधि के दौरान पेंशन का हकदार नहीं होगा।

हाईकोर्ट में याचिका पर बहस के दौरान याचिकाकर्ता का कहना था कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 8 के तहत 16 जनवरी, 2013 को चौटाला को 16 साल (10 साल की सजा जमा 6 अतिरिक्त साल) के लिए अयोग्य ठहराया गया है। यह वह तिथि है जब उन्हें दोषी ठहराया गया और सजा के खिलाफ उनकी अपीलें खारिज हो गईं।

पेंशन में अब तक लिए करोड़ों रुपये
याचिकाकर्ता एडवोकेट अरोड़ा ने जनहित याचिका में कहा कि दोषी ठहराए जाने और 10 साल की सजा होने के बावजूद दोनों पूर्व विधायकों में से अजय सिंह चौटाला हर महीने 50,100 रुपये और ओमप्रकाश चौटाला 2,15,430 रुपये पेंशन के तौर पर लेते रहे।

इस तरह 16 जनवरी, 2013 के बाद दोनों पूर्व विधायक अब तक एक करोड़ रुपये से भी अधिक राशि पेंशन के तौर पर ले चुके हैं। जनहित याचिका में मांग की गई कि इस सारी राशि की दोनों पूर्व विधायकों से वसूली की जाए।
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