चंडीगढ़ में कैब-टैक्सी सेवा दे रही ओला-उबर का लाइसेंस एक महीने पहले खत्म हो चुका है लेकिन अब तक कंपनियां धड़ल्ले से कार्य कर रही हैं। स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) चालान करने का दावा तो कर रहा है लेकिन वह कार्रवाई भी नाकाफी साबित हो रही है इसलिए अब एसटीए ने दोनों कंपनियों को काम बंद करने का नोटिस जारी है।
पहले शहर में ओला-उबर के पास ही कैब्स चलाने का लाइसेंस था, जो चार नवंबर को एक्सपायर हो गया। दोनों कंपनियों की शहर में चार हजार से ज्यादा कैब्स चल रही हैं, जिनमें से अधिकतर मोहाली व पंचकूला में पंजीकृत हैं। दोनों एग्रीगेटर कंपनियों ने लाइसेंस के लिए आवेदन भी किया है लेकिन एंट्री टैक्स का करीब छह करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से एसटीए ने लाइसेंस जारी नहीं किया है, इसलिए मामला उलझ गया है।
कंपनियों का पिछले काफी समय से कहना है कि कैब्स के चालक ही एंट्री टैक्स चुकाएंगे, जबकि कैब चालकों का कहना है कि एसटीए के साथ एग्रीगेटर कंपनियों का समझौता हुआ है, इसलिए एंट्री टैक्स का पैसा भी कंपनियों को ही चुकाना चाहिए। इस बीच कुछ महीने पहले एसटीए ने कई चालकों का चालान भी काटा था, जिसके बाद चालकों ने एसटीए का घेराव भी किया था। अब मामला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में है।
सूत्रों के अनुसार बिना एंट्री टैक्स वसूले एसटीए लाइसेंस जारी जारी करने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, कंपनी और एसटीए के बीच कैब चालक पिस रहे हैं और उनके चालान हो रहे हैं। कैब चालकों की यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि मामले को जल्द सुलझाना चाहिए, क्योंकि इससे कई घर चल रहे हैं और सभी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं।
कंपनियों ने काम बंद किया तो आ सकता है संकट
शहर में हजारों लोग रोजाना एग्रीगेटर कंपनियों के मोबाइल एप पर कैब बुक करते हैं और ऑफिस आने-जाने, घूमने-फिरने समेत विभिन्न कार्यों के लिए कैब्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे कैब चालकों का घर भी चलता है। अगर कंपनियों ने काम बंद कर दिया तो शहर में बड़ा संकट आ सकता है। वर्तमान में अब सिर्फ इनड्राइवर और रैपिडो के पास लाइसेंस है। इसमें भी रैपिडो सिर्फ बाइक टैक्सी सेवा देती है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार कंपनियां काम बंद नहीं करेंगी, क्योंकि उनका दावा है कि उन्होंने लाइसेंस के लिए आवेदन किया हुआ है। लाइसेंस जारी करने में एसटीए की तरफ से देरी की जा रही है। एसटीए के सचिव रूपेश कुमार का कहना है कि दोनों एग्रीगेटर कंपनियों के आवेदन विचाराधीन है।
एंट्री टैक्स वसूलने के लिए एसटीए कई बार जारी कर चुका है नोटिस
पंजाब-हरियाणा में पंजीकृत टैक्सियों को चंडीगढ़ में प्रवेश करने के लिए एंट्री टैक्स का भुगतान करना होता है, लेकिन एग्रीगेटर कंपनियों ने अब तक जमा नहीं कराया है। इसकी वजह से एसटीए ने कैब सर्विस चला रही कंपनी ओला व उबर को कई बार नोटिस जारी किया है। कई रिमाइंडर भी भेजे गए हैं। पिछले साल एसटीए ने लाइसेंस निलंबित करने की भी चेतावनी दी थी लेकिन कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ा।