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Chandigarh News: अधिकारियों पर ठेकेदारों को बचाने के आरोप, 10 साल में एक भी ब्लैकलिस्ट नहीं

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चंडीगढ़। नगर निगम की बैठक में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। निगम के इंजीनियरिंग विभाग ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में किसी भी ठेकेदार या एजेंसी को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया, चाहे काम में कितनी भी देरी या लापरवाही क्यों न हुई हो। अधिकतर मामलों में केवल पेनल्टी लगाकर ठेकेदारों को छोड़ दिया गया।
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बैठक के दौरान पार्षदों ने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और निजी एजेंसियों पर निगम जरूरत से ज्यादा मेहरबान है। कई प्रोजेक्ट वर्षों से लटके हुए हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं की गई। खास तौर पर डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड का मुद्दा चर्चा में रहा, जहां पुराने कचरे को हटाने का काम तय समय में पूरा नहीं हो सका।

जानकारी के अनुसार, इस डंपिंग ग्राउंड पर बायोरेमेडिएशन के जरिए कचरा हटाने के लिए अलग-अलग एजेंसियां काम कर रही हैं। एक एजेंसी तीन साल से, दो पीएसयू दो साल से और एक नई एजेंसी हाल ही में जुड़ी है। पीएसयू को कचरा 45 दिनों में हटाना था, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ। इसके बावजूद किसी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया।
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जब मेयर सौरभ जोशी ने अधिकारियों से पूछा कि क्या पिछले 3, 5 या 10 वर्षों में किसी ठेकेदार या एजेंसी पर ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई हुई है, तो जवाब नहीं में मिला। इतना सुनते ही मेयर सौरभ जोशी नाराज हो गए और उन्होंने सख्त निर्देश जारी किए।

मेयर ने कहा कि जिन ठेकेदारों के काम 3-4 साल से लंबित हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर काम पूरा करना होगा, अन्यथा उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए। साथ ही डंपिंग ग्राउंड पर काम कर रही एजेंसियों को भी मई तक कचरा नहीं हटाने की स्थिति में ब्लैकलिस्ट करने और उनके भुगतान रोकने के निर्देश दिए गए।

पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि वर्षों तक काम लंबित रहने के बावजूद ठेकेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती, जो गंभीर चिंता का विषय है। इस बीच आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने भी कचरा प्रबंधन को लेकर बड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि रोजाना के हिसाब से 96 टन कचरा आखिर कहां जा रहा है। पार्षदों ने आरोप लगाया कि करीब 202 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद कचरा हटाने का काम अधूरा है। आप पार्षद कुलदीप ने कहा कि कुछ एजेंसियां कचरे को हटाने के बजाय उसे वहीं फैलाकर समतल कर रही हैं।

आप पार्षदों ने इस मुद्दे पर पोस्टर लेकर सदन में नारेबाजी भी की। हंगामे के बीच मेयर ने सवाल उठाया कि आखिर इन एजेंसियों पर इतनी नरमी क्यों बरती जा रही है।
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