लिपिक बोले-सरकार न दे हड़ताल के दिनों का वेतन, लंबित कार्य हम भी नहीं करेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। लिपिकों की हड़ताल को लेकर सरकार की ओर से काम नहीं तो वेतन नहीं, के सिद्धांत की पालना में वेतन न निकलवाने संबंधी आदेश जारी किए गए हैं। आदेशों के अनुसार वेतन निकलवाने का अधिकार रखने वाले अधिकारी जिला खजाना कार्यालय में प्रमाण पत्र देंगे कि उनके कार्यालय ने हड़ताल में शामिल किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं निकलवाया है। उधर, लिपिक संघ हड़ताल पर अड़ा है। लिपिक अब जनता जनार्दन की शरण में हैं। उन्होंने आमजन से समर्थन के लिए अपील जारी की है।
हरियाणा में लिपिक पांच जुलाई से हड़ताल पर हैं। सरकार ने पिछले सप्ताह घोषणा की है कि लिपिकों की 35,400 वेतनमान की मांग पूरी नहीं की जा सकती। इसीलिए वे काम पर लौटें और जो लिपिक काम पर नहीं आएगा, उसे काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत लागू करते हुए वेतन नहीं दिया जाएगा। इन आदेशों के बाद सभी विभागों में वेतन निकलवाने की क्षमता रखने वाले अधिकारियों को भी कहा है कि वे यह प्रमाण पत्र देंगे कि उनके कार्यालय ने किसी भी ऐसे कर्मचारी का वेतन नहीं निकलवाया है, जो हड़ताल पर है।
तहसीदलदारों से की अपील- न करें रजिस्ट्री
लिपिक संघ के प्रधान विक्रांत तंवर व महासचिव करण सिंह मोगा ने कहा कि सरकार वेतन काटेगी तो वे भी लंबित कार्य नहीं करेंगे। दूसरा तहसीलदारों से भी अपील है कि वे रजिस्ट्री न करें। यदि वे लिपिक का काम करेंगे तो उनकी गरिमा पर असर होगा। लिपिकों की मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी।
लिपिक ने आमजन को समर्थन के लिए जारी की अपील
प्रधान ने कहा कि लिपिक जनता जनार्दन की शरण में भी गए हैं। आमजन से समर्थन के लिए एक अपील जारी करते हुए कहा गया है कि उनकी मांग उनके काम को देखते हुए कैसे जायज है। बताया गया है कि दूसरे विभागों में उन्हीं के समान काम करने पर कितना वेतन मिल रहा है, लिपिकों को मिलने वाले वेतन व एमपीएचडब्ल्यू, जेबीटी, जेई व डिप्टी रेंजर को मिलने वाले वेतन में कितना अंतर है। अपील में लिपिकों ने दूसरे राज्यों पंजाब, दिल्ली व यूपी में मिलने वाले वेतन की भी जानकारी दी है और बताया है कि 1986 में लागू नीति से लिपिकों के साथ भेदभाव शुरू हुआ। पंजाब व हिमाचल में 20,200 वेतन शुरू में मिलता है। दो साल बाद यह 30,500 व पांच साल बाद 35,400 हो जाता है।
पांच अगस्त को काला दिवस मनाएंगे लिपिक
लिपिक संघ के अनुसार एक अगस्त को भाजपा जिला अध्यक्षों को ज्ञापन देने का कार्यक्रम था। जो एक दिन पहले 31 जुलाई को ही दे दिए। क्योंकि एक अगस्त को सभी जिला अध्यक्षों की सीएम के साथ बैठक है। पहले ज्ञापन इसीलिए दिए हैं कि जिला अध्यक्ष सीएम के सामने उनकी मांग रख सकें। इसके अलावा तीन अगस्त को थाली बजाकर सरकार को जगाने का प्रयास किया जाएगा। चार अगस्त को सरकार का पुतला दहन व पांच अगस्त को काला दिवस मनाया जाएगा।