गांव किशनगढ़ की सैटेलाइट इमेज।
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चंडीगढ़ के दड़वा, किशनगढ़, रायपुर खुर्द और खुड्डा अलीशेर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं। सेटेलाइट की तस्वीरें बता रही हैं कि बीते पांच साल में इन गांवों से कृषि भूमि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया। लाल डोरा तो बहुत पीछे छूट चुका है। भू माफिया खेती की जमीन, सुखना कैचमेंट एरिया और इको सेंसेटिव जोन में भी अवैध प्लॉट काटकर बेच रहा है और यहां घर बन रहे हैं लेकिन अफसरों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा। उनका तो कहना है कि सबकुछ सामान्य है।
शहर में अवैध निर्माण का आलम यह है कि अब गांवों में जितनी आबादी लाल डोरे के अंदर है, उससे कहीं ज्यादा बाहर रह रही है। दड़वा में पिछले पांच वर्षों में अंदर की तरफ बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हुआ है। यहां पूरी की पूरी कॉलोनी बस गई है। सेटेलाइट की तस्वीरों में भी ये साफ दिखता है। किशनगढ़ के कई खेत पिछले पांच साल में खत्म हो गए हैं। अब वहां घर बन गए हैं या दुकानें खुल गई हैं। ये इलाके एसडीएम ईस्ट के अंतर्गत आते हैं इसलिए वर्तमान एसडीएम नीतिश सिंगला ने मंगलवार को सभी पुलिस एसएचओ व अन्य के साथ बैठक की और अवैध निर्माण पर कड़ी निगरानी रखने के आदेश दिए। कार्रवाई जल्द हो, इसके लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है। एसडीएम सिंगला ने कहा कि बैठक के बाद सभी को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। अब अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ सख्ती बरती जा रही है। दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि प्रशासन ने 2016 में एक सर्वे कराया था, उसमें सभी गांवों की जानकारी है। उसके आधार पर जांच की जा सकती है कि पिछले छह वर्षों में कौन-कौन से निर्माण हुए हैं।
ईको सेंसेटिव जोन में काट दिए प्लाट
खुड्डा अलीशेर के कई हिस्से ईको सेंसिटिव जोन में आते हैं जबकि वहां तो अभी भी अवैध निर्माण जारी है। कोविड के दौरान भू माफियाओं ने वहां प्लॉट काटकर बेच दिए और अब घर भी बन गए हैं। यहां वर्ष 2006 तक लगभग सभी निर्माण फिरनी के अंदर ही थे लेकिन वर्ष 2009 के बाद फिरनी के बाहर अवैध निर्माण तेजी से बढ़ गए। खुड्डा अलीशेर के बस स्टैंड से नयागांव की तरफ जाने वाली सड़क के पास अब कई नई दुकानें खुल गई हैं, सभी खेती की जमीन पर बनी हुई हैं। इनमें से ज्यादातर दुकानें लॉकडाउन के बाद बनी हैं। यहां पर गुलमेल मार्केट के पीछे की ओर भी काफी तेजी से निर्माण कार्य हुआ है। कार्रवाई के लिए फरवरी 2020 में एरिया एसडीएम की निगरानी में एक विशेष सेल का भी गठन किया था, उसका भी कोई अता-पता नहीं है।
हर बार चलता है नोटिस का खेल, बाद में बंद हो जाती है फाइल
अवैध निर्माण की शिकायत के बाद हर बार नोटिस दिया जाता है। कई बार अवैध निर्माणों को गिराया भी जाता है लेकिन भू माफिया द्वारा कुछ दिनों बाद वहां दोबारा निर्माण करा दिया जाता है। शहर के कई इलाकों में यह खेल चलता है। इसके बाद इनकी फाइल भी बंद हो जाती है। कार्रवाई होने के मामले में जवाब-तलब होने पर अधिकारी ‘कार्रवाई अंडर प्रोसेस’ बता देते हैं लेकिन असल में होता कुछ नहीं है। वहीं, वर्ष 2021 के बाद लाल डोरा को बढ़ाने की चर्चा चल रही है तो पेरीफेरी में निर्माण कार्य भी तेज हो गया है।
लाल डोरे के बाहर या किसी भी तरह के अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन की नीति स्पष्ट है कि उसे तुरंत तोड़ा जाएगा। सभी को निर्देश दिए गए हैं, कि वह अपने एरिया में नजर रखें और जो अवैध निर्माण कर रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई करें। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक