स्थायी लोक अदालत के आदेश के बावजूद पुनर्वास योजना के तहत फ्लैट न दिए जाने के मामले में सिविल जज मानव की अदालत ने सोमवार को डीसी कम इस्टेट आफिसर मोहम्मद शाईन की सैलरी, एसी, कंप्यूटर और तीन गाड़ियों को जब्त करने के आदेश जारी कर दिए। मामले की अगली सुनवाई दस जनवरी को होगी।
कालोनी नंबर पांच निवासी नसीम अब्बास ने 2011 मे याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि स्थायी लोक अदालत के आदेश के बावजूद इस्टेट आफिस ने पुनर्वास योजना के तहत फ्लैट नहीं दिया था।
इसके बाद उन्होंने इसी साल एक्जीक्यूशन याचिका दायर की। एक्जीक्यूशन याचिका में नसीम के वकील मंजीत सिंह नरियाल ने इस्टेट आफिसर की प्रापर्टी और सैलरी अटैच करने की मांग की थी। इस पर अदालत ने इस्टेट आफिसर को वारंट जारी किए थे।
वारंट जारी होने पर सोमवार को इस्टेट आफिस की तरफ से जवाब दायर किया गया था कि लोक अदालत इस मामले में फैसला नहीं ले सकती।
लोक अदालत का यह आदेश मान्य नहीं है। वहीं नसीम अब्बास के वकील ने इस्टेट आफिसर के जवाब का विरोध किया था।
10 जनवरी से पहले की जाए कार्रवाई
अदालत के आदेश पर गाड़ी नंबर सीएच 01जी1-0009, सीएच 01जी 0090, सीएच 01जी 0028 जब्त की जाएगी। अदालत ने डीसी कम इस्टेट आफिसर की गाड़ियां और सैलरी को दस जनवरी से पहले अटैच करने के लिए कहा है।