चंडीगढ़। उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी आरक्षण लागू हो सकता है। ओबीसी आयोग ने हाल ही में यूटी प्रशासन से उच्च शिक्षण संस्थानों में आरक्षण कोटा लागू करने के बारे में पूछा है। प्रशासन के अधिकारियों ने आयोग को बताया है कि इस संबंध में गृह मंत्रालय (एमएचए) को एक नया प्रस्ताव भेजा गया है। यूटी में ओबीसी आरक्षण लागू होने से जीएमसीएच-32 से एमबीबीएस का सपना देखने वाले युवाओं की राह और कठिन हो जाएगी। वहीं, इसका प्रभाव पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पेक) पर भी पड़ेगा। यूटी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम पिछले हफ्ते नई दिल्ली में ओबीसी आयोग गई थी। जहां उनसे आरक्षण के लिए प्रस्ताव भेजने में देरी के बारे में पूछा गया था। इसके बाद एक नया प्रस्ताव तैयार कर एमएचए को भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत यह शुरू होगा। बता दें कि सामान्य कोटे की सीटें बढ़ाए बिना 27 प्रतिशत आरक्षण के लिए 2022 में ओबीसी आरक्षण रोक दिया गया था। इसे लेकर पूर्व स्वास्थ्य सचिव ने कुछ आपत्तियों के साथ एमएचए को रिपोर्ट भेजी थी।
2007 में भी हुआ था विरोध
चंडीगढ़ प्रशासन ने साल 2007 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के उस आदेश का विरोध किया था, जिसमें जीएमसीएच-32 को केंद्रीय शिक्षा अधिनियम (प्रवेश में आरक्षण) के तहत रखा गया था। इस आदेश के अनुसार, इन संस्थानों में वार्षिक तय संख्या से अधिक सीटें बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, ताकि इस अधिनियम के लागू होने से पहले पिछले शैक्षणिक सत्र में खुली सीटों की संख्या समान रहे। 2022 में केंद्र सरकार को लिखे पत्र में यूटी प्रशासन ने उल्लेख किया था कि जब तक केंद्र सरकार जीएमसीएच-32 में ओबीसी आरक्षण देने के अपने आदेश पर पुनर्विचार नहीं करती, तब तक प्रवेश बिना आरक्षण के ही होंगे।
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2022 में दिया गया था ये हवाला
2022 में यूटी प्रशासन की ओर से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजे गए पत्र में कहा गया था कि जीएमसीएच-32 पंजाब यूनिवर्सिटी से संबद्ध है। इसका निर्माण राज्य अधिनियम 1947 के अनुसार किया गया था। राज्य सरकार इसके लिए 50 प्रतिशत बजट उपलब्ध कराती है। इससे संबंधित नियम-कायदे क्षेत्रीय सीनेट सदस्यों की ओर से बनाए जाते हैं इसलिए यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मानकों का पालन नहीं करता है। यहां ओबीसी आरक्षण का मानक लागू नहीं किया जा सकता।