इस तरह लगभग 79,000 (38 प्रतिशत) स्वास्थ्य कर्मचारियों और 4,000 अगली कतार के वर्करों का टीकाकरण किया जा चुका है, जो काफी कम है। यही वजह है कि रविवार को स्वास्थ्य मंत्री ने हेल्थ वर्करों को इलाज का खर्च और एकांतवास अवकाश देने तक से इनकार कर दिया था। दरअसल, कोविड वैक्सीन के प्रति हेल्थ वर्करों के रुख और सोशल मीडिया पर वैक्सीन को लेकर जारी भ्रांतियों ने पंजाब सरकार की चिंता बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य कर्मी बोले- घोषित विशेष भत्ते आज तक जारी नहीं किया
इसके जवाब में स्वास्थ्य कर्मियों ने कड़ा ऐतराज जताते हुए स्वास्थ्य विभाग और पंजाब सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि फ्रंटलाइन पर कोविड से लड़ने के एवज में घोषित विशेष भत्ते आज तक जारी नहीं किए गए हैं। इसके अलावा स्टाफ की कमी के कारण फ्रंटलाइन और हेल्थ वर्करों को अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके बारे में न तो स्वास्थ्य मंत्री स्थिति स्पष्ट कर रहे हैं और न ही राज्य सरकार कोई फंड जारी कर रही है।
फैसला वापस लें स्वास्थ्य मंत्री : यूनियन
पंजाब हेल्थ वर्कर यूनियन ने स्वास्थ्य मंत्री के बयान में ऐतराज जताते हुए कहा कि इलाज खर्च और अवकाश न देने का फैसला, फ्रंटलाइन व हेल्थ वर्करों के उत्साह को कम करेगा और मुलाजिम जो कि अब तक अपनी जान पर खेलकर कोविड का मुकाबला कर रहे हैं, अपने बचाव पर ध्यान देने लगेंगे। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री से तुरंत अपना फैसला वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि वैक्सीन लेने का फैसला स्वास्थ्य कर्मियों पर छोड़ देना चाहिए।