प्लाजा सेक्टर-17 में सोमवार शाम चंडीगढ़ आर्ट थिएटर और गुरुकुल विद्यापीठ ने नुक्कड़ नाटक ‘स्वर्ग में हड़ताल’ का मंचन किया। नाटक धरती में बढ़ रहे प्रदूषण पर आधारित था। नाटक का मकसद लोगों को पर्यावरण और इसके संरक्षण के लिए जागरूक करना था।
साथ ही लगातार बढ़ रहे कंकरीट के जंगल के प्रति लोगों को सचेत करना था, कि किस तरह मानव अपने शौक और आराम के लिए जंगल काट कर शहर के शहर खड़े कर रहे हैं।
नाटक की शुरुआत होती है स्वर्ग लोक से, जहां तमाम देवता हड़ताल पर हैं। नारद मुनि यह देख कर दंग रह जाते हैं और समझ नहीं पाते है। इसके बाद वह सभी देवताओं के पास जाते हैं और उनकी हड़ताल का कारण पूछते हैं। नारद सबसे पहले पहुंचते हैं गणेश जी के पास।
गणेश जी उन्हें बताते हैं कि धरती में इंसान इतना लालची हो गया है कि एक दूसरे को चोट पहुंचाने लगा है। वहीं इंद्र देव कहते हैं कि धरती में लोगों ने मिट्टी को फर्श और सीमेंट की चादर से ढक दिया है। इसकी वजह से वह जब भी बारिश करते हैं तो वह माटी से नहीं मिल पाते।
इसके बाद नारद मुनि श्री कृष्णा, दुर्गा माता, विष्णु जी, ब्रह्मा और शिवजी के पास जाते हैं। सभी देवता उन्हें धरती में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर रोष जताते हैं। शिवजी नारद मुनि से कहते हैं कि जाओ और धरती में इंसान को पेड़ लगाने और सफाई रखने का संदेश देने को कहते हैं। इस पर नारद धरती पर जाते हैं और मनुष्य से आग्रह करते हैं।
धरती पर मनुष्य नारद के पहनावे का मजाक उड़ाते हैं, जिससे परेशान होकर नारद जी स्वर्ग लौट आते हैं और शिवजी को पूरा किस्सा सुनाते हैं।
इस पर शिवजी को गुस्सा आता है तो वह धरती में एक छोटा सा भूकंप का झटका लगाते हैं। अंत में मानव अपनी गलती स्वीकार करते हुए भगवान से माफी मांगता है और भविष्य में धरती को स्वच्छ रखने का वचन लेता है।
नाटक में विष्णु के किरदार में नैना, दुर्गा के किरदार में जगजीत कौर, नारद के किरदार में हर्ष बख्शी, इंद्र के किरदार में गुरतीरथ, गणेश के किरदार में मोहित और शिवजी के किरदार में रंजीत रॉय नजर आए। नाटक का लेखन और निर्देशन रंजीत रॉय ने किया।