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पीयू के मनोविज्ञान विभाग में अब दो अध्यक्ष

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चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में वर्तमान में दो अध्यक्ष हैं। तीन साल से कार्य कर रहीं प्रो. सीमा विनायक कुर्सी पर बनी हुई हैं। वहीं पीयू ने डॉ. रोशन लाल को अध्यक्ष बनाने के आदेश जारी कर दिए। प्रो. विनायक ने अभी कुर्सी नहीं छोड़ी है।
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सूत्रों का कहना है कि डॉ. रोशन लाल ने कई जगह इस बारे में अवगत कराया, लेकिन उन्हें अध्यक्ष की कुर्सी अब तक नहीं मिल सकी। बताया जाता है कि विभाग में घमासान चल रहा है। छात्र भी परेशान हैं। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि उनका अध्यक्ष कौन है। यह प्रकरण पीयू प्रशासन के पास पहुंचा, लेकिन अधिकारी तमाशा देख रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक प्रो. सीमा विनायक एक अप्रैल 2019 को मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष बनाई गई थीं। तीन साल के लिए वह अध्यक्ष बनीं। साथ ही यह भी आदेश में लिखा था कि जब तक विभाग में कोई अन्य शिक्षक इस पद के लिए पात्र नहीं हो जाता, वह पद पर बनी रहेंगी। तीन साल तक उन्होंने इस पद पर कार्य किया। इसी बीच पीयू प्रशासन ने विभाग के डॉ. रोशन लाल को अध्यक्ष बना दिया, क्योंकि वह आठ साल से अधिक समय से विभाग में तैनात हैं। इसी नियम के मुताबिक असिस्टेंट प्रोफेसर को अध्यक्ष बनाया गया। हालांकि अब उनको पदोन्नति भी मिल गई और वह एसोसिएट प्रोफेसर हो गए।
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सूत्रों का कहना है कि उन्हें प्रो. विनायक ने चार्ज नहीं दिया और अब भी सभी विभागीय कार्य वह खुद निपटा रही हैं। कुछ शिक्षकों का कहना है कि पीयू ने जब डॉ. रोशन लाल को अध्यक्ष बनाया है तो अफसर उस आदेश का पालन क्यों नहीं करवा रहे। सूत्रों का कहना है कि यदि अफसर मामले को नहीं निपटा पा रहे हैं तो कहीं न कहीं घमासान बढ़ाने में उनकी भी हामी है। इसका दंश छात्रों को भुगतना पड़ सकता है। कुछ छात्र परेशान भी हैं। इस संबंध में डीयूआई प्रो. वीआर सिन्हा से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो सका। प्रो. सीमा विनायक ने कहा कि वह एक बैठक में हैं, अभी कुछ नहीं कह सकती।
क्या कहते हैं अधिकारी
मैं पीयू प्रशासन की अनुमति के बिना कोई बयान नहीं दे सकता। हां, यह बात सही है कि मुझे अध्यक्ष बनाने के आदेश जारी हुए हैं। अभी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। -डॉॅ. रोशन लाल, मनोविज्ञान विभाग
किसी विभाग में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद की बात हमने सुनी है, लेकिन प्रकरण हमारे पास आएगा तो उसको देखेंगे। नियमों के मुताबिक कार्य करवाने के लिए अधिकारियों से कहेंगे। -प्रो. अमरजीत सिंह नौरा, सचिव, पुटा
यूसोल में किसी अन्य को समन्वयक बनाया
यूसोल विभाग में भी एक विभाग का समन्वयक किसी वरिष्ठ महिला को बनाया जाना था, लेकिन पीयू के अधिकारियों ने किसी दूसरी जूनियर महिला को समन्वयक बना दिया। यह मामला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि पीयू में मनमाने तरीके से निर्णय हो रहे हैं। वरिष्ठता को दरकिनार कर दिया गया है। यह पीयू के वीसी चाहें तो व्यवस्था ठीक हो सकती है।
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