चंडीगढ़। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2021-22 से अपने स्कूलों में कोडिंग और डाटा साइंस के कोर्स शुरू करने जा रहा है। इन दोनों नए कोर्स का मकसद बच्चों की तार्किक क्षमता को बढ़ाना है। इसके लिए बोर्ड ने सभी सीबीएसई से संबंधित स्कूलों को पत्र जारी कर दिया है, लेकिन शहर के सरकारी स्कूलों में अब इन कोर्स को शुरू करने को लेकर असमंझस बनी हुई है। इसका कारण यह है कि पिछले वर्ष लॉकडाउन में ही स्कूलों में कई कंप्यूटर शिक्षकों का कांट्रेक्ट रद्द कर उन्हें निकाल दिया गया है और अभी इसका केस कोर्ट में लंबित है। वहीं कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती भी नहीं की जा रही है, ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीकी विषय कौन पढ़ाएगा।
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों ने बताया कि सीबीएसई ने इसी सेशन में कोर्स शुरू करने के निर्देश तो दिए हैं, लेकिन ये तकनीकी कोर्स है, कंप्यूटर शिक्षक ही इन्हें पढ़ा सकते हैं। स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षकों की बहुत कमी है, कुछ स्कूलों में ही फिलहाल शिक्षक है। कोरोना महामारी को देखते हुए अभी इसे लेकर असमंजस की स्थिति लग रही है। सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों को इस संबंध में जारी दिशानिर्देश में कहा है कि कोडिंग को कक्षा 6 से 8 तक में 12 घंटे के स्किल मॉड्यूल के तौर पर शामिल किया जाएगा। इससे छात्र-छात्राओं की तार्किक क्षमता भी बढ़ेगी और वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में जान सकेंगे।
बोर्ड ने कहा कि डाटा साइंस विषय को 8वीं कक्षा में 12 घंटे के स्किल मॉड्यूल के तौर पर शामिल किया जायेगा और 11वीं-12वीं में इसे कौशल विषय के तौर पर शामिल किया जाएगा।
एनसीईआरटी ने तैयार की किताबें
साइंस विषय से छात्रों को समस्या समाधान और आंकड़ा या डाटा जुटाने एवं संग्रहित करने के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्हें यह पता चलेगा कि उसका विश्लेषण करके कैसे निर्णय किया जाता है। जो स्कूल 11वीं में स्किल विषय के तौर पर इन विषयों को शामिल करने के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें कोई फीस का भुगतान नहीं करना है। माइक्रोसॉफ्ट की मदद से एनसीईआरटी ने दोनों विषयों के अध्ययन सामग्री और किताबें तैयार की गई हैं। बता दें कि शहर के स्कूलों में स्किल कोर्स के तौर पर आईटी, फैशन आदि कोर्स फिलहाल संचालित हो रहे हैं। जो विद्यार्थी को बारहवीं के बाद सामान्य कौशल आधारित नौकरी दिलवाने में भी सहायक है।