उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि सिद्धू की महत्वाकांक्षाएं बहुत अधिक हैं और वे जहां भी जाते हैं, वहां संतुष्ट नहीं रहते हैं। जब वह भाजपा में थे, तब वे वहां संतुष्ट नहीं थे। आज वह मुख्यमंत्री पद पर नजरें गड़ाए हुए हैं, कल प्रधानमंत्री की कुर्सी भी उन्हें संतुष्ट नहीं कर सकती। इसलिए, वह जहां भी जाते हैं, उनके साथ समस्याएं रहती हैं।
यहां से शुरू हुआ विवाद
- मुख्यमंत्री और सिद्धू के बीच मतभेद पिछले साल अगस्त में सामने आए थे, जब सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने गए थे। वहां उन्होंने पाकिस्तान के सेना प्रमुख को गले लगाया। इस पर कैप्टन ने नाखुशी जाहिर की थी।
- इस घटना के कुछ महीनों बाद सिद्धू ने फिर एक बयान में कहा कि कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ही उनके कैप्टन हैं और अमरिंदर सिंह तो सेना के कैप्टन रहे हैं।
- इसके बाद पिछले सप्ताह सिद्धू की पत्नी ने आरोप लगाया कि कैप्टन और पंजाब मामलों की पार्टी प्रभारी आशा कुमारी के कहने पर उनका टिकट काटा गया है। इस पर सिद्धू ने कहा था कि उनकी पत्नी झूठ नहीं बोलतीं।
- फिर 17 मई को सिद्धू ने राज्य में कांग्रेस सरकार को धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी के मुद्दे पर घेरते हुए सवाल किया था कि 2015 की बेअदबी और गोलीबारी की घटनाओं के संबंध में बादल के खिलाफ कोई प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज की गई? क्या कोई फ्रेंडली मैच चल रहा है। बठिंडा में कांग्रेस के उम्मीदवार अमरिंदर सिंह राजा वाड़िंग के पक्ष में प्रचार कर रहे सिद्धू ने यहां तक कहा था कि अगर 2015 की बेअदबी की घटनाओं पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे इस्तीफा दे देंगे।