चंडीगढ़। पिछले काफी समय से ठहरी मेट्रो परियोजना एक बार फिर रफ्तार पकड़ सकती है। न्यू चंडीगढ़ के पड़ौल में डिपो के निर्माण के लिए पंजाब सरकार करीब 50 एकड़ जमीन देने के लिए राजी हो गई है। अब सिर्फ वन विभाग की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है। हाल ही में प्रशासक के सलाहकार राजीव वर्मा ने पंजाब को पत्र लिखकर पड़ौल की डिपो भूमि के बारे में पुष्टि मांगी थी ताकि एमआरटीएस परियोजना पर आगे का काम शुरू हो सके।
सूत्रों के अनुसार, पंजाब सरकार को एमआरटीएस परियोजना के लिए न्यू चंडीगढ़ में जमीन देने में कोई दिक्कत नहीं है। इस संबंध में प्रशासन के अधिकारियों के साथ मौखिक संवाद भी हो चुका है। अब पंजाब की तरफ से सिर्फ वन विभाग से इस बात की जांच की जा रही है कि यह पूरी तरह से डी-लिस्टेड क्षेत्र है ताकि भविष्य में किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। वन विभाग से मंजूरी मिलने के बाद पंजाब की तरफ से आधिकारिक रूप से यूटी प्रशासन को सूचित किया जाएगा।
रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विसेज (राइट्स) द्वारा तैयार वैकल्पिक विश्लेषण रिपोर्ट (एएआर) के अनुसार परियोजना में एक डिपो भी शामिल है, जिसके लिए न्यू चंडीगढ़ में 50 एकड़ जमीन की जरूरत है। डिपो के लिए न्यू चंडीगढ़ में जमीन पहले ही चिह्नित कर ली गई है। सिर्फ पंजाब सरकार से जमीन पर पुष्टि का इंतजार है। पंजाब की तरफ से डिपो के लिए भूमि पर निर्णय लिए बिना परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती, इसलिए प्रशासन की तरफ से पत्र लिखे जा रहे थे।
मेट्रो डिपो में होते हैं निरीक्षण और रखरखाव जैसे कार्य : एएआर ने जीरकपुर में एक और डिपो का प्रस्ताव रखा था लेकिन पंजाब सरकार ने जमीन देने से इन्कार कर दिया। इसके विकल्प के तौर पर हरियाणा ने पंचकूला के सेक्टर-27 में डिपो बनाने पर सहमति जताई है और इस संबंध में यूटी प्रशासन को प्रस्ताव सौंपा है। मेट्रो डिपो में निरीक्षण और रखरखाव जैसे कार्य किए जाते हैं। उधर, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) ने हेरिटेज सेक्टरों (1 से 30) में मेट्रो लाइनों को पूरी तरह भूमिगत चलाने के लिए पहले ही अपनी मंजूरी दे दी है। हाल ही में दिल्ली में यूटी प्रशासन के अधिकारियों के साथ मंत्रालय की बैठक के दौरान इस पर सहमति भी बन गई है। हालांकि प्रशासन को अभी बैठक के मिनट्स का इंतजार है, जिसके बाद पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।