हाईकोर्ट के इन्हीं निर्देशानुसार हरियाणा सरकार ने इस संदर्भ में वर्ष 2015 में वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु, हरियाणा शहरी विकास निकाय मंत्री कविता जैन और पंचायत विकास मंत्री ओपी धनखड़ समेत अन्य की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी का गठन किया। कमेटी ने हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में लाल डोरा बढ़ाने के संदर्भ में अपनी सिफारिश देनी थी। इस प्रक्रिया के अंतर्गत कमेटी ने लोगों के सुझाव व आपत्तियां मांगीं थी। तभी से मंत्रियों व अफसरों की बैठकों का दौर जारी है।
इस तरह होगा अवैध निर्माणों का निपटारा
अब तमाम सुझावों पर चर्चा करने के बाद यह तय हुआ है कि फिलहाल गांवों का लाल डोरा बढ़ाने को लेकर किए जाने वाले बंदोबस्त की कोई तैयार नहीं है और बंदोबस्त के बिना गांवों का लाल डोरा बढ़ने की कोई गुंजाइश नहीं है। साथ ही यह भी तय किया गया है कि गांवों में लाल डोरे के बाहर बने अवैध निर्माणों का फैसला पंजाब शेड्यूल रोड एंड कंट्रोल्ड एरिया रिसट्रिक्शन ऑफ अनरेगुलेटिड डेवलपमेंट एक्ट 1963 के अनुसार ही होगा। दूसरा, जो गांव नगरपालिका, नगर परिषद और नगर निगमों की हद में शामिल हो चुके है, उनके लाल डोरे से बाहर बने अवैध निर्माणों का फैसला हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरिया एक्ट 1975 के अंतर्गत होगा।
110 साल पहले हुआ था बंदोबस्त
रेवेन्यू रिकार्ड के अनुसार संयुक्त पंजाब (नवंबर 1966 में हरियाणा बना) का आखिरी बंदोबस्त वर्ष 1902 से 1909 तक किया गया। इसी दौरान लाल डोरा बढ़ाया गया था। इसके बाद न ही बंदोबस्त हुआ ना ही लाल डोरा बढ़ाया गया। शिवालिक विकास मंच के प्रदेशाध्यक्ष विजय बंसल ने कहा कि सरकार को लाल डोरा बढ़ाने के लिए गंभीर कदम उठाने चाहिए।