पंजाब यूनिवर्सिटी को एक और सफलता मिली है। शरीर में जाने के बाद जो दवाएं नहीं घुल पाती थीं, अब वह आसानी से घुल जाएंगी और मर्ज को दूर करेंगी। इसके लिए रसायन विज्ञान विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर एसके मेहता ने फॉर्मूला तैयार किया और उसका पेटेंट करवाया है, जिसको मंजूरी मिल गई है। इसको सोफोरोलिपिड एनएलसी डिजाइन का नाम दिया गया है।
सैफ लैब के पूर्व निदेशक प्रो. एसके मेहता की शोधार्थी डॉ. रोहिणी कंवर ने इस पर शोध किया और वर्ष 2017 में इसे पेटेंट करवाने के लिए आवेदन किया। डॉ. रोहिणी कंवर वर्तमान में एमसीएम डीएवी कॉलेज फॉर वुमन में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। प्रो. मेहता ने बताया कि इस विषय पर शोध वर्ष 2013 में शुरू हुआ था। अब पेटेंट को मंजूरी मिल गई है।
दवाओं को पानी में घोलने के लिए चार चीजों का प्रयोग किया गया है। इन चारों चीजों का शरीर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। बताया कि यह आविष्कार न केवल चिकित्सीय प्रभावकारिता को बढ़ाने वाला है, बल्कि उपलब्ध दवा-वितरण नैनो मॉड्यूल से संबंधित जैव-अनुकूलता मुद्दों को हल करने में भी मदद करेगा।