हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका जिगर का टुकड़ा उनकी हर बात माने, उनके हिसाब से चले लेकिन विचारों में टकराव से रिश्तों में दूरियां बढ़ने लगती हैं। कई बार रिश्तों में इतनी कड़वाहट आ जाती है कि अभिभावक बच्चों को बेदखल करने को मजबूर हो जाते हैं। इसके अलावा बच्चों का चाल-चलन या फिर बहुओं द्वारा झूठे दहेज के केस के कारण माता-पिता अपनी औलाद को बेदखल कर देते हैं। रोजाना अखबारों में बढ़ते बेदखली के मामले चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। जानते हैं कुछ ऐसी वजहें जिनके कारण अभिभावक अपने बच्चों से नाता तोड़ने का बड़ा फैसला तक कर लेते हैं -
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बेरोजगारी भी बड़ा कारण
अंबाला के रिटायर्ड टीचर, मास्टर मदनलाल शर्मा के अनुसार 20 साल पहले ऐसा नहीं होता था। इसके पीछे बेरोजगारी सबसे बड़ा कारण है। बेरोजगार युवक-युवतियां खाली बैठे-बैठे खुरापात सोचते हैं, लालसा बढ़ती है लेकिन हाथ में कुछ नहीं आता तो वे नशे की ओर भी अग्रसर हो जाते हैं। कई बार बेटे की तनख्वाह ज्यादा बोलकर रिश्ता कर दिया जाता है जब सच बहू के सामने आता है तो उसका सास-ससुर से टकराव होने लगता है।
मां-बाप से अलग होना और प्रापर्टी में हिस्सा मांगने के कारण माता-पिता अपने बेटे-बहू को अपनी जायदाद से बेदखल कर देते हैं। बहू द्वारा दहेज का झूठा केस डालकर पैसा ऐंठने की सोच, नशे के अलावा सहनशीलता की कमी भी इसके पीछे अहम वजह है। कई बार पैसा मांगने वाले जब माता-पिता के घर तक पहुंचने लगते हैं तो वे अपने बेटे को जायदाद से बेदखल करके अपना पीछा छुड़ाते हैं।
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केस स्टडी
रोजाना बेदखली के बढ़ते मामले चिंता का विषय
- फोटो : File Photo
केस स्टडी : केस एक -
कुरुक्षेत्र के जगदीश लाल ने अपने बेटे को गलत संगत में फंसने और बात न मानने पर बेदखल कर दिया। उनका कहना है कि उन्होंने मन पर पत्थर रखकर ऐसा किया, लेकिन अपनी जायदाद बचाने के लिए ऐसा करना मजबूरी थी।
केस दो -
हालांकि ऐसे केस बहुत कम आते हैं कि मां-बाप अपनी बेटी को बेदखल करते हों। अंबाला के एक पिता ने अपनी बेटी को इसलिए बेदखल किया क्योंकि वह घर से भाग गई थी और अपनी मर्जी से शादी करना चाहती थी।
केस तीन-
चंडीगढ़ के विशाल ने अपने बहू-बेटा के अलावा अपने दोनों पोतों को भी बेदखल कर दिया। कारण बहू-बेटे की करतूतें, लेकिन मजबूरी में दोनों पोतों को भी बेदखल करना पड़ा।
केस चार -
होशियारपुर निवासी सुरेंद्र का कहना है कि उनका बेटा हर बिजनेस में फेल हो रहा था। काफी समय तक तो वे मदद करते रहे, लेकिन बेटे ने पिता के नाम पर उनके दोस्तों और संबंधियों से पैसा लेना शुरू कर दिया। इसके बाद उनके पास बेटे से संबंध तोड़ने के सिवा कोई रास्ता नहीं बचा।
बेटे की भी तकलीफ
चंडीगढ़ के दुकानदार विकास का कहना है कि उसे तो केवल इसलिए पिता ने बेदखल कर दिया कि उसने बिजनेस के लिए पापा से पैसे मांगे थे। पैसे देना तो दूर उन्होंने उसे बिना बताए अपनी संपत्ति से बेदखल कर दिया।
पिछले दो-तीन सालों से बढ़ रहे हैं मामले
अंबाला में विज्ञापन एजेंसी चलाने वाले विकेश पुनयानी का कहना है कि पहले जहां सप्ताह में 1-2 मामले बेदखली के आते थे अब रोजाना 1-2 मामले आने लग गए हैं। इसी तरह करनाल विज्ञापन एजेंसी के अंकुश का कहना है कि माह में 30-40 माता-पिता अपने बच्चों को बेदखल कर रहे हैं। ऐसे ही हर जिले में 20-25 बेदखली के मामले आ रहे हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं मामले
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के वकील विकास चतरथ का कहना है कि मेट्रीमोनियल डिस्प्यूट इसके पीछे खास वजह है। बेटे-बहू के बीच चल रहे पारिवारिक झगड़े से पैदा हुए हालातों से निबटने के लिए ही पेरेंट्स ऐसा करते हैं। बहुओं द्वारा झूठे दहेज उत्पीड़न या किसी दूसरे आरोप में भी अभिभावकों को फंसाए जाने के बढ़ते मामलों के कारण अभिभावक बेटे-बहू से रिश्ता तोड़ने की सार्वजनिक सूचना दे देते हैं। क्योंकि ऐसे केसों में उनके बेटे के साथ-साथ उन्हें भी आरोपी बनाया जा सकता है। ऐसे नोटिस के बाद अभिभावक केवल उसे उस संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं, जो उन्होंने खुद अर्जित की है लेकिन पुश्तैनी संपत्ति से नहीं।
डिक्री लेना भी जरूरी
रोहतक की सुनीता ने बताया कि उसका बेटा गलत संगत में पड़ गया था और उसने एक माह पहले मां की मर्जी के खिलाफ शादी कर ली। अगले ही दिन सुनीता ने एक समाचार पत्र में पब्लिक नोटिस जारी किया कि उसने अपने बेटे से सारे संबंध तोड़ लिए हैं। इसके बावजूद पति-पत्नी में लड़ाई होने पर पुलिस उसके घर भी आई। ऐसे में उसे कोर्ट से औपचारिक डिक्री लेने की जरूरत महसूस हुई।
पब्लिक नोटिस देकर तोड़ा जाता है नाता
जब कोई शख्स अपने बच्चे से संबंध तोड़ने के लिए पब्लिक नोटिस देने का फैसला करता है, तो वह वकील के पास जाता है। वकील अपने लेटर हेड पर एक मैटर तैयार करता है। इसमें मुवक्किल का नाम, पता, उस शख्स का नाम, जिससे संबंध तोड़ा जा रहा है आदि जानकारियां होती हैं। इस पर वकील के साइन भी होते हैं। उसी मैटर के आधार पर किसी अखबार में पब्लिक नोटिस दिया जाता है।