मनप्रीत बादल की पंजाब पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के कांग्रेस से गठबंधन को लेकर पंजाब कांग्रेस में ही विरोध शुरू हो गया है।
पंजाब के सीनियर कांग्रेस नेता जगमीत बराड़ ने आरोप लगाया कि पार्टी के प्रदेश प्रधान प्रताप सिंह बाजवा ने पीपीपी के साथ समझौता कर न सिर्फ मालवा में कांग्रेस को कमजोर किया है, बल्कि इस मामले में हाईकमान को भी गुमराह किया है।
बराड़ ने कहा कि वह मंगलवार को बठिंडा, फरीदकोट और फिरोजपुर के पार्टी वर्करों का पक्ष सुनेंगे। इसके बाद हाईकमान को जानकारी देंगे।
जगमीत बराड़ ने सोमवार को प्रेस कांफ्रेंस कर कहा कि पिछले साल 18 दिसंबर को कांग्रेस भवन में हुई मीटिंग में बाजवा ने कहा था कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ही पीपीपी से किक्की ढिल्लों, काका लोहगढ़ और जगबीर बराड़ को पार्टी में लाए, लेकिन पार्टी को इससे कोई फायदा नहीं हुआ।
अब बाजवा ही मनप्रीत को बठिंडा से चुनाव लड़ाने की तैयारी कर रहे हैं। बराड़ ने कहा कि इसके लिए मालवा के तीनों जिलों के प्रधानों, विधायकों, पूर्व विधायकों को भी विश्वास में नहीं लिया गया।
मनप्रीत अपना मिशन छोड़ चुके हैं और लोग उन्हें छोड़ चुके हैं। मोगा उप चुनाव में उन्होंने कांग्रेस का साथ नहीं दिया। ऐसे में उन्हें बठिंडा से लड़ाकर मालवा के कांग्रेस नेताओं को खत्म करने की साजिश की जा रही है। कल को पीपीपी विधानसभा में भी सीटें मांगेंगी।
बराड़ ने कहा कि मनप्रीत को गिदड़बाहा से हराने वाले अमरिंदर सिंह, राजा वड़िंग जैसे लोगों केदिल पर क्या गुजरेगी।
कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत पार्टी केसीनियर नेताओं, राहुल ब्रिगेड के लोगों तक को इस फैसले से पहले विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि अगर मनप्रीत बादल कांग्रेस के टिकट पर लड़ते हैं तो वह समर्थन करेंगे, लेकिन मौजूदा तरीके से पीपीपी का समर्थन ठीक नहीं है। एक सवाल पर उन्होंने कहा कि बाजवा चुनाव लड़ने से भाग रहे हैं, लेकिन मैं पंजाब में कहीं से भी लड़ने को तैयार हूं।