एक महीने पहले शुरू हुई मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी में एक और नया फीचर जुड़ गया है। मंगलवार को फूड लेबोरेटरी में एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक मिल्क अडल्टरेशन टेस्ट चेकिंग मशीन (मिल्क एनालाइजर) फिट कर दी गई है। इसका फायदा यह होगा कि अब दूध में पानी के साथ यूरिया, डिटरजेंट, कास्टिंग सोडा, अमोनिया सल्फेट, सॉल्ट, हाइड्रोजन, प्रोटीन और फैट की भी जांच हो सकेगी।
उपभोक्ताओं को इसकी रिपोर्ट मात्र दो मिनट में मिल जाएगी। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड डिपार्टमेंट के डेजिग्नेटिड ऑफिसर सुखविंदर सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग शुरू हो गई है। हेल्थ सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल व डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस डॉ. वनीता गुप्ता से स्वीकृति मिलने के बाद दूध की एडवांस जांच शुरू कर दी जाएगी।
केंद्र सरकार की ओर से मिल्क एनालाइजर देश के सिर्फ तीन स्टेट को मिला है। जिसमें चंडीगढ़, यूपी और दिल्ली शामिल है। यह काफी एडवांस मशीन है, जिसकी रिपोर्ट भी काफी सॉलिड होगी। सुखविंदर सिंह ने बताया कि मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी का रिस्पांस काफी अच्छा आ रहा है। दूध और अन्य सामानों की लोग खूब जांच करा रहे हैं। अब तक दूध में पानी की कई शिकायत मिली है।
इससे लोगों में जागरूकता फैली और लोगों ने मिलावटी सामान बेचने वाले लोगों से सामान खरीदना भी बंद कर दिया है। अभी यह सिर्फ शहर के अस्पतालों में खड़ी हो रही है, जल्द ही यह सेक्टरों व अन्य सेंटरों में भी जाएगी। अब तक दूध के 70 में से 15 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमें पानी मिला था। इसके अलावा हल्दी के 15 में से तीन सैंपल पाए गए।
30 रुपये में करा सकते हैं टेस्ट
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी में किसी भी खाद्य पदार्थ की मात्र 30 रुपये में जांच करवा सकते हैं। यह लैब सोमवार को सेक्टर 22 के अस्पताल में, मंगलवार को सेक्टर 8 की डिस्पेंसरी में, बुधवार को सेक्टर 40 की डिस्पेंसरी में, वीरवार को सेक्टर 45 के अस्पताल व शुक्रवार को मनीमाजरा के सिविल अस्पताल में खड़ी होती है। बीते एक अप्रैल को चंडीगढ़ के प्रशासक व हरियाणा-पंजाब के गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी ने हरी झंडी देकर मोबाइल फूड लैब को रवाना किया था। उसके बाद 90 लोग टेस्ट करवा चुके हैं। इनमें चंडीगढ़ के अलावा पंचकूला व मोहाली के लोग भी जांच करा सकते हैं।
डॉ. वनीता गुप्ता, डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेस चंडीगढ़ ने बताया कि मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी से लोगों को फायदा पहुंच रहा है। मेरी लोगों से अपील है कि टेस्टिंग के बाद जब सैंपल फेल आता है तो उस दुकानदार की जानकारी भी दें। ताकि डिपार्टमेंट सही तरीके से उसकी जांच कर सके और उसे कानूनी तरीके से रोका जा सके।